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गुरूकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में एक बड़ा हादस टल गया। करीब 55 बच्चों और एक चालक व परिचालक को मौत बेहद करीब से छू कर निकल गई। हल्द्धानी के तमाम बच्चे कॉलेज टूर पर हरिद्वार आए और गुरूकुल कांगड़ी प्रागंण में पहुंच गए। कुलपति कार्यालय के बाहर उनकी बस गुजरी तो बस की छत बिजली के तारों को तोड़ते हुए आगे बढ़ गई। गनीमत रही कि उस वक्त बिजली के तारों में करंट नही था। बिजली विभाग ने शट डाउन लिया हुआ था। इस घटनाक्रम को आंखों से देख रहे गुरूकुल के सफाईकर्मी की रूह कांप गई। बस में बैठे बच्चों को भी इस बात का अंदाजा नही लग पाया कि वह मौत को मात दे चुके है।
5 अप्रैल 2025 का दिन दोपहर के करीब दो बजे थे। गुरूकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के छात्र कुलपति कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। यूथ फेस्टिवल कराने की मांग लेकर जिदद पर अड़े थे। बाहर कुछ सफाईकर्मी सड़क पर झाडू लगा रहे थे। तभी गुरूकुल कांगडी परिसर में एक टूरिस्ट बस प्रवेश करती है। गुरूकुल कांगड़ी विद्वालय के मुख्य द्वार के सामने आते ही बस की छत बिजली के तारों को चपेट में ले लेती है। बस चालक को कुछ अंदाजा हो गया था। वह बस रोक देता है। लेकिन बस में सबकुछ पहले की तरह सामान्य था। बस मस्ती कर रहे थे। सफाईकर्मी घबरा जाते है। तारों के चपेट में आने का शोर मचाते है। लेकिन जब पता चलता है कि बिजली के तारों में करंट नही था और बिजली गुल है तो सभी राहत की सांस लेते है।
बस सभी को पता चल गया था कि अनहोनी टल गई है। अर्थात जाको राखे साइयां मार सके ना कोए। कहावत चरितार्थ हो गई। लेकिन यहां गुरूकुल प्रशासन की लापरवाही सामने आई। बिजली के तार सड़क से कुछ ऊंचाई पर ही झूल रहे है। ऐसे में इन तारों को ऊंचा कराना बेहद जरूरी है।
GURUKUL गुरूकुल कांगड़ी में बच गई 57 जिंदगी, मौत करीब से छू कर निकल गई



