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पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर आज भी सकारात्मक सोच रखते है। उनका मानना है कि जिस दूरदर्शी सोच के साथ उन्होंने आज ही के दिन पांच साल पहले गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। वह आज नही तो कल जरूर फलेगा। उत्तराखंड के मंत्री और विधायकों को गैरसैंण में ही रहना होगा और वही पर सत्र आयोजित करके उत्तराखंड के विकास की पटकथा को लिखना होगा।
यह बात हम नही कह रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के एक लाइन के शब्दों का बयान उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शा रहा है। उनका मानना है कि बीज बोया है तो एक दिन जरूर फलेगा। इस बात को बोलते हुए उनके चेहरे पर आत्मविश्वास का भाव साफ झलक रहा है। आंखों में चमक और हृदय में संतुष्टि का भाव नजर आ रहा था। मानों कहना चाहते हो कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर लिया हुआ मेरा निर्णय उत्तराखंड की जनता के हित में था। उत्तराखंड की जनता की समस्याओं को दूर करने का निर्णय गैरसैंण में बैठकर ही लिए जा सकते है। जिस सोच के साथ उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ उसकी सार्थकता गैरसैंण में ही सिद्ध होगी। पहाड़ ही जनता का दर्द शांत वादियों में बैठकर ही सुनाई देगा। मानो कहना चाह रहे थे कि विधायकों को राज्यहित में गैरसैंण में ही सत्र आयोजित करना होगा। जब वहां विधायक पहुंचेंगे तो वहां उन्नति होगी और विकास की किरण भी चमकेगी।
TRIVENDRA SINGH RAWAT सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर बोले, फलेगा



