श्री बदरीनाथ धाम के कपाट विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद




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न्यूज127, चमोली।
विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार 25 नवंबर को वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन, सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों और “जय बदरीविशाल” के उदघोषों के बीच अपराह्न 2:56 बजे शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद कर दिए गए। शीतल मौसम के बावजूद धाम में पाँच हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने कपाट बंद होने की पावन प्रक्रिया के दर्शन किए।
कपाट बंद होने के अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर को विशेष रूप से पुष्पों से सजाया गया। विभिन्न स्थलों पर दानदाताओं द्वारा भंडारे आयोजित रहे। सेना के बैंड की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया।
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर खुला, महाभिषेक पूजा संपन्न हुई। बाल भोग और दिन का भोग लगाने के क्रम में श्रद्धालु लगातार दर्शन करते रहे। दोपहर डेढ़ बजे कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। सायंकालीन पूजा सम्पन्न होने के बाद श्री लक्ष्मी माता की मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया गया। इसके उपरांत श्री उद्धवजी और श्री कुबेरजी गर्भगृह से बाहर लाए गए। शाम को श्री कुबेरजी बामणी गाँव के रात्रि प्रवास हेतु प्रस्थान कर गए।

घृतकंबल और परंपराओं के बीच हुआ कपाट बंद
कपाट बंद होने से पूर्व माणा महिला मण्डल द्वारा विशेष रूप से तैयार निर्वाण रूप घृतकंबल भगवान बदरीविशाल को अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान के आभूषणों का श्रृंगार विलग किया गया। निर्धारित मुहूर्त में रावल अमरनाथ नम्बूदरी ने स्त्री वेष धारण कर ठीक 2:56 बजे गर्भगृह के द्वार बंद किए। तत्पश्चात मंदिर का मुख्य द्वार भी बंद कर दिया गया। मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, पदाधिकारी, रावल, धर्माधिकारी और वेदपाठियों ने मंदिर परिक्रमा कर सिंहद्वार पर आकर विधि-विधान की पूर्णता का संकेत दिया। आज बुधवार प्रातः देवडोलियाँ पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी।

कपाट बंद होने की पाँचदिवसीय प्रक्रिया
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तैयारियाँ 21 नवंबर से प्रारम्भ हुई थीं
21 नवंबर: भगवान गणेश के कपाट बंद
22 नवंबर: आदि केदारेश्वर एवं शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद
23 नवंबर: खड्ग–पुस्तक पूजन एवं वेद ऋचाओं का वाचन पूर्ण
24 नवंबर: माता लक्ष्मी को न्यौता
25 नवंबर: मुख्य कपाट शीतकाल हेतु बंद

पूजन-अर्चना धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट एवं अमित बंदोलिया की उपस्थिति में सम्पन्न हुई। कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में चारधाम यात्रा में सहयोगी सभी संस्थाओं, विभागों, सेना, आईटीबीपी, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, तीर्थ पुरोहितों व हकहकूकधारियों का आभार जताया।

50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने की चारधाम यात्रा
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में इस वर्ष चारधाम यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया—50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए। 16.5 लाख से अधिक श्रद्धालु श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने कहा कि शीतकाल में पांडुकेश्वर व अन्य पूजा स्थलों पर पूजाएँ परंपरा अनुसार संचालित होंगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से शीतकालीन दर्शन हेतु भी आने का आग्रह किया। कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, सदस्यगण तथा मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल उपस्थित रहे।

मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि कपाट बंद होने के बाद भी समिति के स्वयंसेवक मंदिर सुरक्षा और आईटीबीपी–पुलिस के साथ समन्वय में कार्य करते रहेंगे। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने जानकारी दी—26 नवंबर: श्री कुबेरजी, श्री उद्धवजी एवं रावल जी पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगे। 27 नवंबर: आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी तथा श्री गरुड़जी ज्योतिर्मठ (नृसिंह मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे।

समारोह में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज, दंडी स्वामी मुकुंदानंद, बीकेटीसी सदस्य महेंद्र शर्मा, प्रह्लाद पुष्पवान, देवीप्रसाद देवली, धीरज मोनू, पंचभैया, दिनेश डोभाल, डॉ. विनीत पोस्ती, नीलम पुरी, आशुतोष डिमरी सहित अनेक संत, पदाधिकारी, तीर्थ पुरोहित, हकहकूकधारी और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।