संविधान न्याय, समानता और स्वतंत्रता का जीवंत संकल्प : गजेन्द्र सिंह शेखावत




Listen to this article

न्यूज127, नई दिल्ली
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में बुधवार को “नींव : भारतीय संविधान की महिला शिल्पी” शीर्षक से भव्य प्रदर्शनी और विचार–विमर्श कार्यक्रम आयोजित हुआ। कलाकोश विभाग द्वारा नारी संवाद प्रकल्प के अंतर्गत आयोजित इस विशेष आयोजन का उद्देश्य संविधान निर्माण में महिलाओं के योगदान को राष्ट्र के समक्ष सशक्त रूप से प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने किया।

अपने संबोधन में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने कहा कि संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का महान संकल्प है, जिसने भारत की राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक चेतना को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम हजारों बलिदानों का परिणाम था और संविधान ने उन विरासतों को एक जीवंत राष्ट्र-आत्मा में रूपांतरित किया।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों—अम्मू स्वामीनाथन, हंसा मेहता, सुचेता कृपलानी, राजकुमारी अमृत कौर, रेणुका रे, विजयलक्ष्मी पंडित सहित अन्य—के असाधारण साहस, दृष्टि और वैचारिक योगदान को याद करते हुए कहा कि संख्या कम होने के बावजूद इन महिलाओं ने संविधान की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाई। “नींव” प्रदर्शनी इसी मातृशक्ति के योगदान को उजागर करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने संविधान को भारत के जीवन मूल्यों की आधारशिला बताते हुए उसकी मूल संरचना—संघीय व्यवस्था, मौलिक अधिकार, पावर का विभाजन और न्यायिक पुनरावलोकन—को लोकतंत्र की स्थिरता का आधार बताया। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. अलका चावला ने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसी संवेदनाएँ समाज में सबसे पहले स्त्री से जन्म लेती हैं, इसलिए संविधान निर्माण में महिला दृष्टि अनिवार्य थी।

आईजीएनसीए सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने पर वर्षभर चले कार्यक्रमों का समापन आज हो रहा है। इस अवसर पर संविधान की यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शोधकर्ताओं, छात्रों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।