नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने देश की आर्थिक दिशा को स्पष्ट करते हुए औद्योगिक विकास, मैन्युफैक्चरिंग और उभरती तकनीकों को प्राथमिकता दी है। इस बजट का मूल मंत्र है—निवेश, नवाचार और आत्मनिर्भरता। सरकार का साफ संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित किया जाएगा।
बजट में बायो-फार्मा सेक्टर को नई ऊर्जा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। इससे दवाइयों, वैक्सीन और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और भारत वैश्विक फार्मा बाजार में और मजबूत स्थिति बना सकेगा।
रणनीतिक दृष्टि से अहम रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर’ विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी मैग्नेट और उन्नत सामग्री के उत्पादन में भारत की निर्भरता को कम करेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के लिए बजट में 40,000 करोड़ रुपये के बड़े प्रस्ताव का ऐलान किया गया है। इससे मोबाइल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इसके साथ ही कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर मजबूत होगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को नई रफ्तार मिलेगी।
छोटे और मझोले उद्योगों यानी एसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड घोषित किया गया है। यह फंड नवाचार, विस्तार और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को उद्योग समर्थक और भविष्य उन्मुख बजट माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाला दशक भारत के औद्योगिक उत्थान और वैश्विक आर्थिक नेतृत्व का दशक होगा।
धुरंधर बजट 2026: औद्योगिक विकास, मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव







