नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने जहां स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कई उत्पादों को सस्ता कर आम लोगों को राहत दी है, वहीं तंबाकू, शराब और लग्जरी वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाकर उन्हें महंगा कर दिया गया है। बजट के प्रावधानों का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना तय है।
बजट के मुताबिक कैंसर की दवाएं, शुगर की दवाइयां, EV बैटरी, बायोमास CNG, कपड़े, जूते और माइक्रोवेव ओवन जैसे जरूरी और घरेलू उपयोग के सामान सस्ते होंगे। इसके अलावा विदेश यात्रा और विमानों के ईंधन से जुड़े शुल्कों में राहत से हवाई सफर भी अपेक्षाकृत किफायती हो सकता है। सरकार का कहना है कि इन कदमों से स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर शराब, सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला जैसे उत्पादों पर टैक्स बढ़ाया गया है, जिससे ये और महंगे हो जाएंगे। इसके साथ ही खनिज, स्क्रैप, ऑप्शन ट्रेडिंग, विदेशी परफ्यूम, लग्जरी घड़ियां और आयातित वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा तय माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन वस्तुओं पर कर बढ़ाने का उद्देश्य गैर-जरूरी और विलासिता आधारित खपत को हतोत्साहित करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार बजट 2026 का फोकस साफ है—जरूरतों को सस्ता, शौक को महंगा। इससे आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी, जबकि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक वस्तुओं की खपत पर अंकुश लगेगा। कुल मिलाकर बजट ने संतुलन साधते हुए जनता की प्राथमिक जरूरतों को केंद्र में रखा है।
बजट 2026: आम आदमी को राहत, शौक और विलासिता पर बढ़ी मार







