बजट 2026-27: लोक-कल्याण और आधुनिकता का संतुलित महासेतु— प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार बत्रा








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हरिद्वार
शिक्षाविद् एवं प्राचार्य, एसएमजेएन कॉलेज डॉ सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 मात्र आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की आकांक्षाओं और वैश्विक चुनौतियों के बीच एक सशक्त ‘आर्थिक कवच’ के रूप में उभरता है। इस बजट की परतें खोलने पर भविष्य के भारत की तीन स्पष्ट दिशाएँ दृष्टिगोचर होती हैं— शैक्षिक नवाचार, सामाजिक सुरक्षा और सुदृढ़ बुनियादी ढांचा।

शिक्षा सुधार: साक्षरता से आगे नवाचार की ओर
डॉ सुनील बत्रा ने कहा कि बजट में 50 हजार नई अटल टिंकरिंग लैब्स की घोषणा इस बात का संकेत है कि सरकार अब डिग्री-केंद्रित शिक्षा से आगे बढ़कर कौशल, अनुसंधान और नवाचार-आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। साथ ही 10 हजार नई मेडिकल सीटों का सृजन स्वास्थ्य शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल ब्रेन ड्रेन पर अंकुश लगेगा, बल्कि मध्यम वर्गीय युवाओं के लिए डॉक्टर बनने का सपना अधिक सुलभ होगा।

मध्यम वर्ग और सामाजिक न्याय का सशक्त संतुलन
डॉ सुनील बत्रा ने कहा कि यह बजट मध्यम वर्ग को वह राहत प्रदान करता है, जिसकी लंबे समय से अपेक्षा थी। नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय को प्रभावी रूप से कर-मुक्त करना उपभोग को प्रोत्साहित करेगा और अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाएगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर-छूट की सीमा को दोगुना करना तथा गंभीर बीमारियों में प्रयुक्त 36 दवाओं को सीमा शुल्क से मुक्त करना सरकार की कल्याणकारी राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कुंभ प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर का अंतर्संबंध

डॉ सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि भारत जैसे देश में, जहाँ कुंभ जैसे विशाल मानव समागम आयोजित होते हैं, वहाँ लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। बजट में प्रस्तावित 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तथा 20 राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास ऐसे आयोजनों के प्रबंधन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाएगा। यह बुनियादी ढांचा पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ेगा।
एमएसएमई को संजीवनी
डॉ सुनील बत्रा ने कहा कि 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड छोटे और मझोले उद्यमों के लिए सुरक्षा कवच सिद्ध होगा। यह रोजगार सृजन की उस रीढ़ को मजबूती देगा, जो कोविड-काल के झटकों के बाद पुनः खड़ी हो रही है।
उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास की गति को बरकरार रखना एक जटिल चुनौती थी, जिसमें वित्त मंत्री काफी हद तक सफल दिखाई देती हैं। हालांकि इस बजट की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल एग्री-स्टैक और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का लाभ ग्रामीण भारत तक कितनी शीघ्रता से पहुँचता है। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 ज्ञान, विज्ञान और जन-कल्याण का एक संतुलित एवं दूरदर्शी दस्तावेज है, जो भारत को 2047 के विकसित राष्ट्र के संकल्प की ओर मजबूती से अग्रसर करने की क्षमता रखता है।