नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026 में करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने आयकर और विदेशी संपत्ति से जुड़े कई प्रावधानों को डीक्रिमिनलाइज कर दिया है। अब कई मामलों में आपराधिक कार्रवाई की जगह केवल जुर्माना भरकर मामला निपटाया जा सकेगा।
बजट प्रस्तावों के अनुसार, ऑडिट न कराना, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट में चूक या वित्तीय जानकारी देने में गलती को अब अपराध की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। इसके अलावा दस्तावेज उपलब्ध न कराना या वस्तु के रूप में भुगतान पर टीडीएस न काटना भी अब आपराधिक अपराध नहीं रहेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छोटे और तकनीकी मामलों में अब केवल आर्थिक दंड लगाया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में अधिकतम सजा की अवधि को घटाकर दो वर्ष कर दिया गया है। साथ ही अदालत को यह अधिकार दिया गया है कि वह इस सजा को भी जुर्माने में बदल सके।
बजट में विदेशी संपत्ति से जुड़े मामलों में भी बड़ी राहत दी गई है। 20 लाख रुपये से कम की विदेशी संपत्ति घोषित न करने पर अब 1 अक्टूबर 2024 से कोई दंड या आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक कानूनी झंझट से राहत मिलेगी और टैक्स अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रावधानों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार होगा और कर प्रणाली अधिक सरल व करदाता-हितैषी बनेगी।
केंद्रीय बजट 2026 में कर कानूनों में बड़ी राहत, चूक अब अपराध नहीं







