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दुनिया में भले ही आज वेलेंटाइन डे मनाया जा रहा हो लेकिन भारत में आज का दिन मातृ—पितृ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बच्चे अपने माता पिता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
पाश्चात्य संस्कृति के ‘वैलेंटाइन डे’ के विकल्प के रूप में युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने और माता-पिता के प्रति सम्मान व कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए इसकी शुरुआत की गई। शुरुआत: इस पर्व की पहल आसाराम बापू द्वारा वर्ष 2006-2007 में की गई थी। यह दिवस बच्चों को अपने माता-पिता की सेवा और उनके प्रति प्रेम प्रकट करने का अवसर देता है। कई राज्यों जैसे गुजरात में स्कूलों में भी इसे आधिकारिक तौर पर प्रोत्साहित किया गया है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने का एक माध्यम बन चुका है।
पूजन: माता-पिता को ऊंचे आसन पर बैठाकर उनका तिलक करें और पुष्प अर्पित करें।
परिक्रमा: जिस प्रकार भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की थी, उसी भाव से उनकी आरती और परिक्रमा करें।
आशीर्वाद: उनके चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद लें और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।







