मैं मां गंगा की गोद में जा रहा हूं , बीएएमएस छात्र ने गंगा में लगाई छलांग








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हरिद्वार।
धर्मनगरी हरिद्वार में एक दर्दनाक घटना ने शिक्षण संस्थानों और छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया। ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के बीएएमएस द्वितीय वर्ष के 21 वर्षीय छात्र ने कथित रूप से मानसिक तनाव के चलते गंगा में कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को छात्र के किराए के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उसने जीवन से हताश होने की बात लिखी है।


जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान यशपाल (21 वर्ष) पुत्र पुष्पेंद्र पाल के रूप में हुई है। वह मूल रूप से शाही भवन, इंदिरा नगर, पेंडलेगंज, जनपद गोरखपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी था। वर्तमान में वह हरिद्वार के मायापुर क्षेत्र स्थित विकास कॉलोनी में किराए पर कमरा लेकर रह रहा था और नियमित रूप से कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह यशपाल अपने कमरे से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। साथी छात्रों को चिंता होने पर कमरे की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। नोट में यशपाल ने लिखा कि वह अपने जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाया है और वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं है। इसी मानसिक हताशा के चलते उसने गंगा में कूदकर आत्मघाती कदम उठाने का निर्णय लिया।
मामले की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और कंट्रोल रूम
की टीमें सक्रिय हो गईं। गंगा तट और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर खोजबीन अभियान चलाया गया।
घटना की खबर फैलते ही कॉलेज परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। छात्र-छात्राओं में गहरा आक्रोश भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने कॉलेज और अस्पताल परिसर के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जानी चाहिए, ताकि आत्महत्या के पीछे के वास्तविक कारणों, किसी संभावित मानसिक दबाव या अन्य परिस्थितियों की सच्चाई सामने आ सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को
कब्जे में लेकर उसकी जांच की जा रही है। साथ ही छात्र के दोस्तों, शिक्षकों और परिजनों से भी पूछताछ की जाएगी। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर छात्रों में बढ़ते मानसिक तनाव और प्रतिस्पर्धात्मक दबाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार, मित्रों और संस्थानों को समय रहते संवाद और परामर्श की पहल करनी चाहिए, ताकि किसी भी युवा को इस तरह का कठोर कदम उठाने की नौबत न आए।