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होलिका दहन और रंग का त्योहार होली मनाने को लेकर असमंजस बना हुआ है। इस बार होलिका दहन से अगले दिन रंग नहीं खेला जाएगा। ऐसा होगा तीन मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण होने के कारण। होलिका दहन 2 मार्च को होगी जबकि रंगों का पर्व होली 4 मार्च को खेला जाएगा।
प्रेरणा ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्र अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया 3 मार्च को भारतीय समय के अनुसार दिन में 3:20 से चंद्र ग्रहण का प्रारंभ होगा जो शाम 6:47 तक रहेगा. शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण के शुरू होने से 9 घंटे पहले ही सूतक का प्रारंभ हो जाता है। इसीलिए प्रातः सूर्य उदय से पूर्व 6:20 से ग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जाएगा। इसी कारण इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन के बाद भी हमें 3 मार्च को रंग नहीं खेलना चाहिए। रंगों के इस पर्व को 4 मार्च को ही मानना उचित रहेगा। बताया कि इसका एक आधार ये भी है, कि रंग उत्सव फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पश्चात अगले दिन चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस बार चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 4 मार्च को सूर्य उदय से लेकर शाम 4:48 तक रहेगी। ऐसे में रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाना उचित रहेगा।
होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन सूर्यास्त के पश्चात होलिका दहन किया जाना चाहिए। होलिका दहन के समय पूर्णिमा का होना अति आवश्यक है, जबकि होलिका दहन के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च को शाम 5:55 से प्रारंभ होगी जो कि अगले दिन 3 मार्च को शाम सूर्यास्त से पहले 5:07 पर समाप्त हो जाएगी।2 मार्च को पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 5:55 से होगा लेकिन उसी के साथ भद्रा का भी प्रारंभ हो जाएगा जो अगले दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में लगभग 5:31 तक रहेगी।
इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में
ऐसे में शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भद्रा के मुख काल जो रात्रि 2:32 से प्रारंभ होगा उससे पू्र्व ही होलिका दहन करना चाहिए। ऐसे में भी प्रदोष काल जो लगभग शाम 6:21 से और शाम 7:09 तक रहेगा तथा भद्रा का पुच्छ काल जो लगभग रात्रि 12:50 से देर रात्रि लगभग दो बजकर 30 मिनट तक रहेगा, इस बीच में ही इस वर्ष होलिका दहन शास्त्र सम्मत रहेगा। स्थानिक समय और स्थानीय मान्यता के अनुसार विद्वान अपने अनुसार इन दोनों समय में कभी भी होलिका दहन कर सकते हैं। वैसे भी इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में होने के कारण भद्रा के पुंछ काल होलिका दहन किया जा सकता है।
सूतक काल में खानपान और मनोरंजन निषेद्य
प्राचीन काल से ही ग्रहण के सूतक काल में खाना पीना किसी भी प्रकार का मनोरंजन करने कि हिंदू धर्म शास्त्रों में सख्त मनाई है। मान्यता के अनुसार ग्रहण के सूतक काल में भगवान का भजन पूजन ध्यान आदि करना चाहिए।
2 मार्च को होली के पूजन का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त — दोपहर 12:08 से दोपहर 12:55 तक
चर चौघड़िया — दोपहर 1:58 से दोपहर 3:25 तक







