नवीन चौहान
मित्रता, सेवा और सुरक्षा का संकल्प लेकर खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मी डयूटी और दान करके मानवता का फर्ज अदा कर रहे है। पुलिस के इस मानवीय दृष्टिकोण को देखकर जनता देवदूत पुकार रही है। पुलिसकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा में तत्पर है। उत्तराखंड पुलिस के इन सभी जवानों ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 3 करोड़ का फंड जुटाने की व्यवस्था की है। जिसके लिए सभी राजपत्रित अधिकारियों ने 03 दिन का वेतन तथा अराजपत्रित अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वेच्छा से 01 दिन का वेतन देने पर सहमति दी है।
उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण काल के दस्तक देने के बाद लॉक डाउन की स्थिति में सबसे पहले उत्तराखंड पुलिस ने सड़कों पर उतरकर मोर्चा संभाला। एकाएक लॉक डाउन होने पर उत्तराखंड की विषम परिस्थितियों ने पुलिस ने बेहतर कार्य किया। जनता को सुरक्षा का वातावरण दिया और दुख की घड़ी में उनके साथ होने का एहसास कराया। भूखी प्यासी जनता को राशन, पानी से लेकर भोजन और आवास की व्यवस्था कराई। उत्तराखंड पुलिस के एक—एक सिपाही से लेकर तमाम उच्चाधिकारियों ने विपरीत स्थिति को अनुकूल बनाया और जनता को राहत पहुंचाने का कार्य किया। पुलिस की सजगता, मुस्तैदी और कर्तव्यनिष्ठा के चलते जनता को कोई खास परेशानी देखने को नही मिली। लेकिन सबसे बड़ी बात जो है वो ये कि पुलिस ने डयूटी के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में भी सहयोग देने का जज्बा दिखाया। पुलिस महानिदेशक अनिल के रतूड़ी और पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड अशोक कुमार के कुशल मार्गदर्शन में उत्तराखंड पुलिस ने बेहतर तरीके से अपने फर्ज को अंजाम दिया। पुलिस की सक्रियता के चलते उत्तराखंड के हालात अच्छी स्थिति में है और कोरोना का वायरस नियंत्ररण में है। इसी मित्र पुलिस ने अपने वेतन से तीन करोड़ देने की तैयारी कर ली। पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिये उत्तराखण्ड पुलिस ने लगभग 03 करोड़ रुपए स्वैच्छिक योगदान से मुख्यंमत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है।
उत्तराखण्ड पुलिस कर रही डयूटी और दान, मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 03 करोड़


