नवीन चौहान
कोरोना संक्रमण काल में सबसे बड़ी मार गरीब मजदूरों पर पड़ी है। मजदूरों के पेट भूखे है और हाथ खाली है। काम की तलाश में निकले सैंकड़ों मजदूर कड़क धूप में सड़क किनारे खड़े रहते है। किसी ठेकेदार को देखते ही लपक पड़ते है। मजदूरों को उम्मीद रहती कि काश आज काम मिल जाए। लेकिन हालात ये है कि एक—एक मजदूर को सप्ताह में एक दिन ही काम मिल पा रहा है। हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मंडी में तमाम सैंकड़ों मजदूर रोजाना सुबह काम की तलाश में पहुंचते है। लेकिन खाली रह जाने पर दुखी मन से अपने घर लौट जाते है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों के हितों की रक्षा करने का दंभ भरते है। गरीबों के लिए तमाम कल्याणकारी योजनाओं को शुरू करने का दावा करते है। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में गरीब मजदूरों की बेबसी की हकीकत किसी से छिपी नही। मजदूरों को दो वक्त की रोटी नसीब नही हो पाई। सरकारी राशन भी गरीबों के घरों तक नही पहुंचा। राशन वितरण में भी राजनीति प्रवेश कर गई। वोट बैंक के आधार पर राशन वितरण हुआ। लेकिन स्वाभिमानी मजदूरों को लॉक डाउन के बाद काम मिलने की खुशी हुई। मजदूरों की आंखों में चमक दिखाई दी। उनको लगा कि अब पुराने दिन लौट आयेंगे। उनको काम मिलने लगेगा। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। निर्माण कार्य बंद है। निवेशकों ने हाथ बांध रखे है। कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। बाजार की हालत दयनीय है। ऐसे में मजदूरों को काम मिलने के आसार नजर नही आ रहे है। मजदूर बेचारे भूखे पेट रोजगार की तलाश में निकलते है और खाली हाथ घर लौट जाते है। कब आयेंगे अच्छे दिन। बस इन मजदूरों को अच्छे दिनों का इंतजार है।
हरिद्वार में मजदूरों के पेट भूखे और हाथ खाली, देंखे वीडियो



