नवीन चौहान, हरिद्वार। पिता वर्दी पहनकर देश की सेवा कर रहे है तो बेटी भारत की कैप पहनकर देश का नाम विश्व पटल पर गौरवांवित कर रही है। माता पिता और कोच के आशीर्वाद से उत्तराखंड की बेटी कुहू ने भारत को ग्रीस में आयोजित बैडमिंटन के मिक्सड डबल खिताब अपने नाम कर भारत को मैडल दिया है। कुहू ने देश के साथ-साथ अपने उत्तराखंड प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। कुहू की इस विराट जीत पर राज्य के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत, खेल मंत्री अरविंद पांडेय सहित तमाम खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। कुहू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बेटी बेटों से कम नहीं होती है। बस उनको प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना चाहिये।

उत्तराखंड के एडीजी प्रशासन अशोक कुमार की बेटी कुहू गर्ग बचपन ने ही बैडमिंटन के खेल में रुचि लेने वाली प्रतिभावान खिलाड़ी रही है। कुहू ने बैडमिंटन के खेल में मुकाम हासिल करने के लिये दिन रात कड़ी मेहनत की। राज्य स्तर की कई प्रतियोगिताओं में मेडल अर्जित किये।

इसी के साथ उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला तो वहां भी वह लगातार अपने खेल प्रतिभा का जौहर दिखलाती चली गई। कुहू ने सैंकड़ों मेडल जीतकर खेल के जज्बे को बरकरार रखा। आखिरकार वो दिन भी आ गया जिसका सपना कुहू गर्ग ने देखा था। उसको भारतीय बैडमिंटन टीम में खेलने का अवसर मिला। कुहू को ग्रीस में खेलने का मौका मिला। ओपल इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट के डबल मुकाबले के सेमी फाइनल में कुहू गर्ग और रोहन कपूर की जोड़ी ने स्वीडन की की जोड़ी को हराकर खिताबी दौर में जगह बनाने में कामयाब रही।

फाइनल मुकाबले में कुहू गर्ग और रोहन ने शानदार प्रदर्शन करते हुये भारत के ही करिश्मा बाडेकर और उत्कर्ष अरोड़ा की जोड़ी को सीधे सेटों में 21-19 और 21-19 से हराकर खिताब अपने नाम किया। जब कुहू गर्ग और रोहन के खिताब जीतने की खबर उत्तराखंड पहुंची तो प्रदेशवासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत,खेल मंत्री अरविंद पांडेय सहित तमाम लोगों ने कुहू को जीत की बधाई दी।

बैडमिंटन कोर्ट में आठ घंटे अभ्यास करती है कुहू
हरिद्वार। अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू को अनुशासन का पहला पाठ घर से ही मिला। आईपीएस अफसर पिता अशोक कुमार खुद बेहद अनुशासित है। पिता के संस्कारों का प्रभाव ही है कि कुहू ने देश का मान बढ़ाने का संकल्प खुद ही तय कर लिया। सुबह सबेरे पांच बजे उठने के बाद वह बैडमिंटन कोर्ट में खूब पसीना बहाती है। दिन में करीब आठ घंटे अभ्यास करती है। रात को दस बजे सो जाती है।

कुहू को पंसद है पनीर की सब्जी
हरिद्वार। कुहू गर्ग को शाकाहारी भोजन पंसद है। वह पनीर खाने की बेहद शौकीन है। कुहू के साथ ही पिता अशोक कुमार और माता अलकनंदा भी शाकाहारी भोजन पंसद करते है। कुहू को बैडमिंटन के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिये माता पिता ने सदैव उसका हौसला बढ़ाया। कुहू के मैच हार जाने पर हमेशा उसको अगले मैच में जीत दर्ज करने की प्रेरणा दी। परिवार का आशीर्वाद और कुहू की मेहनत का नतीजा रहा कि आज वह देश का प्रतिनिधित्व कर रही है।

हरिद्वार के डीपीएस से सीखा कुहू ने अक्षरज्ञान
हरिद्वार। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू की प्रारंभिक शिक्षा हरिद्वार के ही भी स्थित डीपीएस स्कूूल रानीपुर से हुई है। कुहू ने केजी, प्रथम और द्वितीय कक्षा डीपीएस से की। आईपीएस अफसर पिता अशोक कुमार के स्थानांतरण के साथ ही कुहू को स्कूल बदलना पड़ा। लेकिन कुहू ने अपना लक्ष्य नहीं बदला। बचपन से ही बैडमिंटन की शौकीन कुहू ने रैकेट को हाथ में थामा तो उसको अपने सिरहाने लगा लिया। कुहू कभी बैडमिंटन से दूर नहीं रहती है।



