हरिद्वार।
नूरपुर पंजनहेड़ी फायरिंग प्रकरण में आरोपी तरुण चौहान को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सत्र न्यायालय हरिद्वार ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश प्रभारी सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत द्वारा 7 मार्च 2026 को पारित किया है।
विदित हो कि, कनखल थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 31/2026 में आरोपी तरुण चौहान पुत्र दीपक कुमार निवासी ग्राम नूरपुर पंजहेड़ी, थाना कनखल, जिला हरिद्वार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 61(2), 249 और 109 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में गिरफ्तारी की आशंका के चलते आरोपी की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई थी।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि तरुण चौहान निर्दोष हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि घटना के दिन प्रशासन द्वारा भूमि विवाद के संबंध में दोनों पक्षों को बुलाया गया था। जब वह अपने चाचा अतुल कुमार चौहान के साथ मौके पर पहुंचे तो पहले से मौजूद दूसरे पक्ष के लोगों ने हथियारों से हमला कर दिया। आरोप लगाया गया कि आत्मरक्षा में अतुल चौहान ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग की, जबकि तरुण चौहान ने कोई फायरिंग नहीं की और न ही किसी को चोट पहुंचाई।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सह-अभियुक्त ब्रह्मचारी सुधानंद को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है और तरुण चौहान का मामला भी उसी के समान है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह जांच में पूरा सहयोग करेगा, इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है। अभियोजन के अनुसार 28 जनवरी 2026 को आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर वादी अमित कुमार, सचिन चौहान और संदीप मुंशी आदि पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की थी, जिसमें सचिन के पेट और कृष्णपाल के हाथ में गोली लगी थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत का अधिकार असाधारण परिस्थितियों में ही दिया जाता है, जब यह प्रतीत हो कि किसी व्यक्ति को झूठा फंसाया गया है या वह अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-अभियुक्त को जमानत मिलने मात्र से अन्य आरोपियों को स्वतः जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता। प्रत्येक आरोपी की भूमिका और परिस्थितियों को अलग-अलग आधार पर देखा जाता है।
मामले की गंभीरता, घटना में दो लोगों को गोली लगने और जांच अभी जारी होने के कारण अदालत ने तरुण चौहान की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इस आदेश के बाद तरुण चौहान की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है और मामले की विवेचना पुलिस द्वारा जारी है।




