गगन नामदेव
हरिद्वार के वरिष्ठ अधिवक्ता अरूण भदौरिया ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजकर मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर 16 साल से अधिक आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदियों को जेल से रिहा करने की मांग की है। इस पत्र में उन्होंने दूसरे राज्यों की ओर से कैदियों के हितों में किए गए प्रयासों का हवाला दिया है।
कोरोना संक्रमण अवधि के दौरान देश में कोरोना का भयंकर प्रकोप फैला हुआ है। देश में कोरोना के चलते मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उत्तराखंड भी इससे अछूता नही है। कोरोना का संक्रमण कैदियों तक पहुंच चुका है। ऐसे हालात को देखते हुए हरिद्वार के अधिवक्ता अरूण भदौरिया ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह को एक पत्र भेजा है। पत्र में बताया है कि 16 साल से अधिक की सजा पूरी कर चुके कैदियों को कोरोना वायरस की महामारी के चलते शेष सजा माफ कर जेल से रिहा करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की संख्या करीब 350 है। जिनमें से काफी लोगों ने 16 साल की सजा पूर्ण कर ली है। जबकि पैरोल पर बाहर आकर सामान्य जीवन व्यतीत कर चुके है। लेकिन लॉक डाउन अवधि में कैदियों की उनके परिवारजनों से मुलाकात नही हो पा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकार आजीवन कारावास के कैदियों के लिए रिआयत कर चुकी है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार भी मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर कैदियों को सामान्य जीवन जीने तथा समाजहित के कार्यो में उनकी उपयोगिता का लाभ ले सकती है। सरकार के इस कदम से कैदियों को एक बार फिर सामान्य जीवन व्यतीत करने अवसर मिलेगा। वह समाज की मुुख्यधारा में शामिल होकर देश के काम आ सकेंगे। इससे उत्तराखंड सरकार की भी प्रशंसा होगी।
मुख्यमंत्री को अधिवक्ता अरूण भदौरिया ने भेजा पत्र, कैदियों को छोड़ने की गुहार



