पथ प्रवाह, नवीन चौहान
हरिद्वार के व्यापारियों से रंगदारी वसूली जाने का खुलासा कुख्यात सुनील राठी के गुर्गो ने किया है। हरिद्वार के व्यापारियों में खौफ समाया हुआ था।
गुर्गो की पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने हरिद्वार के कारोबारी जगत में सनसनी फैला दी। एसटीएफ के अनुसार दोनों आरोपी सुनील राठी के इशारे पर हरिद्वार और देहरादून की बेशकीमती एवं विवादित जमीनों में हस्तक्षेप कर उगाही कर रहे थे।
उत्तराखण्ड में संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ और देहरादून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात अपराधी सुनील राठी गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर हरिद्वार के व्यापारियों से की जा रही रंगदारी का पर्दाफाश किया है। आरोपियों के कब्जे से 02 अवैध पिस्टल (.32 बोर) और 07 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी देहरादून में किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन उससे पहले ही संयुक्त टीम ने उन्हें धर दबोचा।
सत्यापन अभियान में मिली बड़ी सफलता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में सक्रिय अपराधियों और बाहरी राज्यों से जुड़े संदिग्ध तत्वों के खिलाफ विशेष सत्यापन और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 26 फरवरी 2026 को राजपुर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध स्कॉर्पियो वाहन को रोका गया। तलाशी में वाहन सवार दो युवकों के पास से अवैध हथियार बरामद हुए।
गिरफ्तार अभियुक्त:
भानू चौधरी पुत्र आलोक कुमार, निवासी सहारनपुर (उ.प्र.)
पारस पुत्र जगपाल सिंह, निवासी मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)
दोनों के खिलाफ थाना राजपुर में मु0अ0सं0- 40/2026 धारा 111(3) बीएनएस व 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
गैंग का तरीका बेहद सुनियोजित था—
पहले विवादित संपत्तियों और बड़े व्यापारियों की पहचान करते थे। फिर फोन कॉल या संदेश के माध्यम से धमकी देते और “राठी के नाम” का हवाला देकर दबाव बनाकर अंततः मोटी रकम की वसूली करते थे।
सूत्रों के अनुसार कई व्यापारियों से लाखों रुपये की रंगदारी वसूली गई, लेकिन गैंग के खौफ के कारण किसी ने खुलकर शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं दिखाई।
कुख्यात गैंगों से जुड़ा रहा है आरोपी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पारस का आपराधिक इतिहास लंबा और संगीन है। वह पूर्व में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और कुख्यात अपराधी संजीव जीवा गैंग से भी जुड़ा रहा है। दोनों की मृत्यु के बाद उसने सुनील राठी गैंग का दामन थाम लिया। जांच में यह भी सामने आया कि पारस जेल में निरुद्ध राठी के लगातार संपर्क में था और सह-अभियुक्त भानू के साथ उससे मिलने भी जाता था।
हरिद्वार के एक प्रॉपर्टी डीलर का नाम भी आया सामने
पूछताछ के दौरान हरिद्वार के एक विवादित प्रॉपर्टी डीलर का नाम भी सामने आया है, जो पूर्व में हत्या के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं स्थानीय स्तर पर गैंग को संरक्षण या सहयोग तो नहीं मिल रहा था।
लंबा आपराधिक रिकॉर्ड
अभियुक्त पारस पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2012 से 2020 के बीच मुजफ्फरनगर और देहरादून के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ कई संगीन मामले पंजीकृत रहे हैं।
संयुक्त टीम की अहम भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में उत्तराखण्ड एसटीएफ के निरीक्षक अबुल कलाम के नेतृत्व में टीम तथा थाना राजपुर प्रभारी निरीक्षक प्रदीप सिंह रावत व उनकी टीम की निर्णायक भूमिका रही। तकनीकी और मैनुअल इनपुट के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
आगे क्या?
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गैंग के अन्य सदस्यों, फाइनेंसरों और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। हरिद्वार के व्यापारियों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है, ताकि रंगदारी के इस नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध और भूमाफिया के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।






