विख्यात कलाकारों ने कैनवास पर उकेरे भाव, दिलों को छू गई पेंटिंग








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आठ दिवसीय ‘पंचम अखिल भारतीय समकालीन कला प्रदर्शनी–2025’ सम्पन्न

हरिद्वार
शिवालिकनगर स्थित ज्–47 कला वीथिका में आयोजित आठ दिवसीय ‘पंचम अखिल भारतीय समकालीन कला प्रदर्शनी – 2025’ का आज भव्य समापन हुआ। समकालीन कला की विविध विधाओं से सजी इस प्रदर्शनी ने हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, रुड़की सहित दूर-दूर से आए कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और पत्रकारों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आठ दिनों तक कला वीथिका में दर्शकों का तांता लगा रहा।

प्रदर्शनी में एक्रेलिक, वुडकट, वाटर कलर, पेन एंड इंक, मिक्स्ड मीडिया, ऑयल कलर, लीनोकट, डिजिटल आर्ट और टेराकोटा जैसी विधाओं में बनाई गई उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे विख्यात कलाकारों की रचनाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

आयोजक अशोक गुप्ता ने बताया कि हजारों कला प्रेमियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रतिदिन सभी आयु वर्ग के दर्शकों की उपस्थिति उत्साहजनक रही। कई कलाकृतियों को दर्शकों द्वारा विशेष सराहना मिली, जिनमें—कानपुर के शशांक दुबे की ’बर्डन ऑफ एजुकेशन’, देहरादून के कर्नल भरत भंडारी की ’टेक द प्लंज’,जमशेदपुर की हरजोत कौर की ’डेली लाइफ’, दिल्ली के सूसनाता चटर्जी की ’विलेज इन मूनलाइट’ आजमगढ़ के अरुणेश वासुदेव की ’मॉडर्न लेडी’,देहरादून के जाकिर हुसैन की ’अनटाइटल्ड’,अमृतसर के कवि चोहान की ‘लैंडस्केप’,हरिद्वार के जय गुप्ता का ‘मन्थक’,संत शर्मा का डिजिटल चित्र ’गॉसिप’,हरिद्वार के अशोक गुप्ता की ’इन्सोलेंस ऑफ ताड़का’और रुड़की की अल्का आर्या की ’ग्लोरी ऑफ रामा’ मुख्य आकर्षण बने रहे।

प्रदर्शनी का आयोजन समकालीन कला को नई दिशा देने के उद्देश्य से किया गया। शांतिनिकेतन से प्रशिक्षित, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ चित्रकार अशोक गुप्ता द्वारा कला वीथिका में प्रतिवर्ष यह प्रदर्शनी निःशुल्क आयोजित की जाती है। कला को समर्पित उनके इस प्रयास को दर्शकों ने मुक्तकंठ से सराहा।
समापन अवसर पर कला प्रेमियों ने अशोक गुप्ता एवं कि
रण गुप्ता को वृहद और सफल आयोजन के लिए सम्मानित किया। अध्यक्षा किरण गुप्ता ने सभी कलाकारों, दर्शकों एवं पत्रकारों को आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसी प्रदर्शनी जारी रखने का संकल्प दोहराया। यह प्रदर्शनी न सिर्फ कला प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनी, बल्कि उभरते कलाकारों को नई ऊँचाइयाँ देने का माध्यम भी साबित हुई।