गुरूकुल कांगड़ी की पहली महिला कुलपति प्रो. हेमलता का सम्मान, इतिहास में दर्ज नया कीर्तिमान




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  • कार्यवाहक कुलपति प्रो. हेमलता ने संभाला दायित्व, संघर्ष को बताया सत्य की जीत
    नवीन चौहान,
    गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। माननीय उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद प्रोफेसर डॉ. हेमलता ने एक बार फिर कार्यवाहक कुलपति का कार्यभार संभाला। खास बात यह रही कि यह अवसर शिक्षक दिवस के दिन आया, जिसने पूरे परिसर के माहौल को और अधिक भावुक और उत्सवपूर्ण बना दिया। सभी कर्मचारियों ने 60 दिनों के आंदोलन के क्षणों का स्मरण करते हुए उत्साह के पलों में तब्दील किया। कुलपति प्रोफेसर हेमलता का विश्वविद्यालय पहुंचने पर शिक्षकों और कर्मचारियों ने फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया और शिक्षक दिवस की शुभकामनाओं के बीच पुनः दायित्व संभालने पर बधाई दी। कर्मचारियों ने मिठाई खिलाकर उनको जीत की बधाई दी।

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं” – प्रो. हेमलता
संवाददाता नवीन चौहान से विशेष बातचीत में कार्यवाहक कुलपति प्रो. हेमलता ने कहा कि “जीत हमेशा सत्य की होती है। न्यायालय से न्याय मिलने के बाद हम फिर से कर्मचारियों और छात्रों के बीच हैं। दुर्भाग्य यह रहा कि एडमिशन प्रक्रिया के दौरान विश्वविद्यालय विवादों में घिरा, जिसका असर शैक्षिक माहौल पर पड़ा। लेकिन अब हमारा लक्ष्य इसे विश्वविख्यात संस्थान बनाना है।” उन्होंने कहा कि महिला डीन को विभागों से हटाना गलत था। अब उनकी प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता, कर्मचारियों का हित और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य पर होगी।

कर्मचारियों से भावुक मुलाकात
प्रो. हेमलता ने धरना स्थल पर आंदोलनरत कर्मचारियों से भी भेंट की। नम आंखों से उन्होंने कर्मचारियों का आभार जताते हुए कहा कि यह संघर्ष और न्याय की जीत है।
“मैं कर्मचारियों का अहित नहीं होने दूंगी। निजी स्वार्थ के लिए यदि किसी ने किसी को परेशान किया तो उसका विरोध होगा। मैं अकेले न्यायालय तक पहुंची, पर जीत सबकी हुई है।”

श्रद्धानंद का सपना साकार करने का संकल्प
प्रो. हेमलता ने स्पष्ट कहा कि वह स्वामी श्रद्धानंद के सपनों का गुरुकुल बनाने आई हैं। “मेरा सपना है कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाए। यहां से पढ़े छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की कीर्ति को चारों ओर फैलाएं। ड्रोन लैब जैसे नए प्रोजेक्ट हमारी उपलब्धियों की शुरुआत हैं। आने वाले समय में और भी बड़े प्रोजेक्ट लाकर विश्वविद्यालय को शीर्ष पर ले जाएंगे।”

गौरव पुनः स्थापित करने का लक्ष्य
प्रोफेसर हेमलता ने कहा कि वह यहां विश्वविद्यालय के गौरव को पुनः स्थापित करने आई हैं – “मैं आराम करने नहीं, बल्कि पूरी शिद्दत से काम करने आई हूं। अनुशासन, आदर्श और शिक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुरूप कार्य होगा। हम सब मिलकर गुरुकुल का स्वाभिमान और सम्मान बनाए रखेंगे।”

उत्सव का माहौल
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की पुण्य भूमि में शिक्षक दिवस का यह दिन इतिहास में महिला कुलपति प्रोफेसर हेमलता के सम्मान की जीत में स्मरण रहेगा। आदर्श और अनुशासन और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पहली महिला कुलपति प्रोफेसर हेमलता उच्च न्यायालय तक पहुंची। उन्होंने न केवल अपने शिक्षकों का सम्मान किया, बल्कि गुरूकुल के गौरव को बचाने के लिए भी संघर्ष किया। महिला कुलपति प्रो. हेमलता की गुरूकुल कांगड़ी में वापसी के साथ ही संघर्ष, न्याय और नए संकल्प की गूंज भी सुनाई दे रही है। अब सभी की निगाहें इस ओर हैं कि प्रो. हेमलता विश्वविद्यालय को किस ऊंचाई तक ले जाती हैं।

कर्मचारियों ने दिखाया अनुशासन
गुरूकुल कांगड़ी में इस जीत के जश्न में अनुशासन साफ नजर आया। रजनीश भारद्वाज ने कुलपति प्रोफेसर हेमलता का स्वागत किया। नरेंद्र मलिक ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया। किसी कर्मचारी ने मां का दर्जा दिया तो किसी कर्मचारी ने अपनी बड़ी बहन के रूप में उनको सम्मान दिया। कर्मचारियों के इस प्रेम को देखकर कुलपति प्रोफेसर हेमलता अभिभूत नजर आई। उनकी आंखें नम थी और शब्दों में कर्मचारियों के लिए आभार था।