गुरूकुल कांगड़ी की कुलपति प्रोफेसर डॉ. हेमलता का आक्रामक अंदाज, अनुशासन व आदर्श की मिसाल




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न्यूज127
गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर डॉ. हेमलता कृष्णमूर्ति इस वक्त आक्रामक कार्यशैली के साथ पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही हैं। विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने अनुशासन और आदर्श को आधार बनाकर कार्य करना शुरू कर दिया है।

शनिवार को विश्वविद्यालय के शिक्षकों से मुलाकात के दौरान कुलपति ने स्पष्ट संदेश दिया कि गुरूकुल के गौरव को फिर से स्थापित करने के लिए हर शिक्षक को पूरी ताकत के साथ एडमिशन प्रक्रिया में योगदान देना होगा। इसी अवसर पर उन्होंने सभी विभागों की कार्यशैली की समीक्षा भी की।

कुलपति प्रोफेसर डॉ हेमलता ने कहा कि “गुरूकुल परिवार है, परिवार में मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। सभी को एकजुट होकर संस्थान के हित में काम करना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि बीते दिनों के घटनाक्रमों से विश्वविद्यालय की साख को धक्का पहुंचा है, ऐसे में अभिभावकों और छात्रों का विश्वास कायम रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

कार्यालय में बैठकर नियमित कार्य प्रारंभ कर चुकीं डॉ. हेमलता ने कर्मचारियों को भी संदेश दिया कि उनकी नजर में सभी समान हैं और इस कुर्सी पर बैठकर उनका दृष्टिकोण केवल विश्वविद्यालय के हित में ही रहेगा।

गौरतलब है कि बीते दो माह से विश्वविद्यालय में आर्य प्रतिनिधि सभा की दखलअंदाजी के चलते लगातार विवाद और खींचतान का दौर चला। इस दौरान प्रभात कुमार कुलपति पद पर काबिज हो गए थे, वहीं रजिस्ट्रार पद को लेकर भी सुनील कुमार और विपुल शर्मा के बीच विवाद गहराया। अंततः माननीय हाईकोर्ट का निर्णय डॉ. हेमलता के पक्ष में आने के बाद प्रभात कुमार को पद छोड़ना पड़ा।

अब सबसे बड़ा सवाल कुलाधिपति पद को लेकर खड़ा है। आर्य प्रतिनिधि सभा ने जहां डॉ. एसके आर्य को कुलाधिपति घोषित कर रखा है, वहीं बीओएम (बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट) की बैठकों के निर्णय भी संदेह के घेरे में हैं।

फिलहाल, कुलपति प्रो. हेमलता बेहद सतर्कता के साथ कदम बढ़ा रही हैं। विश्वविद्यालय के कर्मचारी और शिक्षक वर्ग उनसे बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं कि उनके नेतृत्व में गुरूकुल कांगड़ी की साख एक बार फिर ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

गुरूकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के इतिहास में पहली महिला कुलपति बनने का गौरव हासिल कर चुकी प्रोफेसर डॉ हेमलता का पार्ट दो कार्यकाल अहम फैसलों के लिए जाना जायेगा। उनके चेहरे पर नजर आने वाली सादगी अब प्रबल आत्मविश्वास में बदल चुकी है। उनकी बातचीत की शैली में गजब का बदलाव देखने को मिला है। सहजता और सरलता का उनका अंदाज अब आक्रामक हो चुका है। संभावना है कि कुलपति प्रोफेसर आदर्श, अनुशासन की बड़ी लकीर खड़ी कर दे।