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हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंशुल सिंह ने हरिद्वार के ग्रामीणों को अपने पुराने मकान को तोड़कर नए भवन निर्माण करने में बड़ी राहत देने का प्रयास किया है। ग्रामीणों की इस समस्या से निजात दिलाने वाले प्रस्ताव पर एचआरडीए की बोर्ड बैठक में मंजूरी दिला दी है। अब शासन स्तर पर इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाना है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद ग्रामीणों को अपने नए मकान को बनाने में सहूलियत होगी।
विदित हो कि हरिद्वार के दशकों पुराने गांव अब हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण की जद में आ गए है। गांव की तंग गलियों के मकान जर्र—जर्र हो चुके है। कच्चे पक्के मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके है। ऐसे में कुछ ग्रामीण अपने पुराने मकानों को ध्वस्त कराकर नव निर्माण करना चाहते है तो हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण का अधिकार क्षेत्र बाध्यता उत्पन्न करता है। जिसके चलते ग्रामीण अपने मकान पर निर्माण नही कर पाते है।
ग्रामीणों की इस समस्या पर संजीदगी दिखाते हुए हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंशुल सिंह ने ऐसे तमाम गांवों का सर्वे कराया और चिंहीकरण कराया। उपाध्यक्ष अंशुल सिंह ने पाया कि आठ से 10 फुट की सड़कों के किनारे पुराने मकान जीर्ण शीर्ण हालत में है। ऐसे में अगर एचआरडीए ग्रामीणों को राहत प्रदान करेगा तो ग्रामीणों को अपने पुराने मकान का नव निर्माण करने में आसानी होगी। इसी के चलते इस विषय का प्रस्ताव बनाकर बोर्ड बैठक में रखकर मंजूरी दिलाने में पहली सीढ़ी पार कर ली। गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने भी इस मामले में जल्द ही निर्णय कराने का आश्वासन दिया है।



