सीएम पुष्कर धामी की कैबिनेट के अहम फैसले: 589 वन श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, ईएसआई में 94 पद सृजित








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देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित की गई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेशहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट के फैसलों में ड्रग फ्री उत्तराखंड अभियान को संस्थागत मजबूती देने, वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान प्रदान करने, कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के चिकित्सा ढांचे के विस्तार, सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की अवधि बढ़ाने, कारागार अधिनियम में संशोधन तथा बोनस संदाय संशोधन विधेयक-2020 को वापस लेने जैसे अहम विषय शामिल रहे।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मिलेगा स्थायी ढांचा
ड्रग फ्री उत्तराखंड मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए कैबिनेट ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के लिए अलग ढांचा खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्ष 2022 में गठित इस टास्क फोर्स में अब तक पुलिस बल से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक लिए जाते थे।
अब राज्य मुख्यालय स्तर पर पहली बार 22 पद सृजित किए गए हैं। इनमें एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी, आठ आरक्षी तथा दो आरक्षी चालक शामिल हैं। सरकार का मानना है कि स्थायी संरचना बनने से नशा तस्करी के विरुद्ध अभियान को और गति मिलेगी।
589 वन श्रमिकों को मिलेगा न्यूनतम 18 हजार वेतन
वन विभाग में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए मंत्रिमंडल ने 589 श्रमिकों को न्यूनतम 18,000 रुपये मासिक वेतन देने का निर्णय लिया है।
मंत्रिमंडलीय उप-समिति की संस्तुति के आधार पर यह फैसला लिया गया। वन विभाग एवं वन विकास निगम में कुल 893 दैनिक श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से 304 को पहले से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। शेष 589 श्रमिक अब इस दायरे में आएंगे।
ईएसआई चिकित्सा सेवा के लिए नई नियमावली, 94 पद स्वीकृत
राज्य मंत्रिमंडल ने “उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत कुल 94 पद सृजित किए जाएंगे।
इनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक का पद शामिल है। इससे पूर्व ईएसआई के ढांचे में केवल एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद ही स्वीकृत थे। नए ढांचे से चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की अपेक्षा है।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की अवधि बढ़ी
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को वित्तीय वर्ष 2025-26, अर्थात 31 मार्च 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम
उन्नयन योजना की अवधि भी एक वर्ष बढ़ाई गई है। इसी क्रम में राज्य सेक्टर की योजना को भी विस्तार दिया गया है। भविष्य में यदि केंद्र सरकार इस योजना की अवधि आगे बढ़ाती है, तो राज्य में भी इसे स्वतः विस्तारित माना जाएगा।
कारागार अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव
मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण को मंजूरी दी है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार “आदतन अपराधी (Habitual Offenders)” शब्द की परिभाषा राज्य विधानमंडल द्वारा अधिनियमित कानूनों के अनुरूप की जानी आवश्यक है। संशोधन विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।
बोनस संदाय संशोधन विधेयक-2020 वापस लेने का निर्णय
कोविड-19 महामारी के दौरान उद्योगों को राहत देने के उद्देश्य से बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 में प्रावधान किया गया था कि आवंटनीय अधिशेष उपलब्ध होने पर ही न्यूनतम बोनस का भुगतान किया जाएगा।
हालांकि, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार ने इस प्रावधान पर असहमति जताई थी। वर्तमान में कोविड जैसी आपात परिस्थितियाँ न होने और विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त न होने के कारण इसे आगे बढ़ाया जाना संभव नहीं हो सका। इन परिस्थितियों में राज्य सरकार ने उक्त विधेयक को यथास्थिति विधानसभा से वापस लेने का निर्णय लिया है।