भारतीय सेना का रैम प्रहार, जमीन-पानी और आसमान में दिखाया दुश्मन को धूल चटाने का रण कौशल




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न्यूज 127., हरिद्वार।
भारतीय सेना की खड़ग कोर के अंतर्गत आने वाली रैम डिविजन ने एक्सरसाइज ‘रैम प्रहार’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। हरिद्वार में करीब एक महीने तक चले इस अभ्यास का लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, जीओसी–इन–सी, पश्चिमी कमांड, ने निरीक्षण किया। हरिद्वार में ​शनिवार को इस अभ्यास का समापन हुआ।

इस दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने कहा कि वर्तमान में युद्ध काफी चुनौतीपूर्ण है। इसमें टैक्नोलाजी बड़े पैमानें में शामिल हो गई है। इसीलिए हमें तकनीकी के साथ युद्ध मैदान के लिए पूरी तरह महारथ हासिल करते रहना होगा। उन्होंने कहा कि रैम डिवीजन एक महीने से ट्रेनिंग कर रही थी। इस डिवीजन का मकसद पाकिस्तान के इलाके में घुसकर दुश्मनों को बर्बाद कर लक्ष्य को प्राप्त करना है। हमें जो टॉस्क मिला है वह बेहद महत्वपूर्ण है। हम जानते हैं आपेरशन सिंदूर से दुश्मन का जो नुकसान हुआ है उसके बाद वह हरकत से बाज नहीं आएगा। लेकिन इस बार यदि उसने कोई गलत दुस्साहस करने का प्रयास किया तो उसे और अधिक करारा जवाब दिया जाएगा।

संयुक्त युद्ध अभ्यास था ये आयोजन
सेना की ओर से बताया ​गया कि यह एक प्रमुख एकीकृत सशस्त्र सेना एवं सेवाओं का युद्धाभ्यास था, जो भारतीय सेना के आधुनिक, अनुकूलनशील, तेजी और तकनीक-सक्षमता की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इस अभ्यास ने सेना की परिचालनिक तेजी, बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं तथा भूमि, वायु और साइबर सभी क्षेत्रों में वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि की है। वर्तमान संवेदनशील क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए यह सैन्य तैयारी, प्रतिरोधक और रणनीतिक दृढ़ शक्ति को रेखांकित करता है।

अभ्यास से पहले किया गया सत्यापन
अभ्यास से पहले, रैम डिविजन ने विभिन्न युद्धाभ्यास ड्रिल्स और टैक्टिक्स, टेक्नीक एवं प्रोसीजर (TTPs) का सत्यापन किया। अभ्यास के दौरान क्वचित सेना, पैदल सेना, इंजीनियर तथा आर्मी एविएशन के द्वारा गतिशील युद्धक्षेत्र में समन्वय के साथ अभियान संचालित किया गया। अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग, ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस) एकीकरण, AI आधारित निर्णय सहायता तंत्र तथा नेटवर्क-सक्षम कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम के प्रयोग ने यह दर्शाया कि भारतीय सेना जटिल और तकनीक-प्रधान युद्धक्षेत्रों में विजय प्राप्त करने की सेना की क्षमता रखती है।

रैम प्रहार सेना की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण
एक्सरसाइज ‘रैम प्रहार’ भारतीय सेना की उस अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है जिसके माध्यम से वह समन्वय, नवाचार और जनता के साथ अपने मजबूत संबंधों से शक्ति प्राप्त करते हुए फुर्तीला, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बने रहने का संकल्प रखती है। यह अभ्यास भारत की उस दृढ़ क्षमता का सूक्ष्म, किंतु सशक्त संकेत भी है जिसके बल पर राष्ट्र अपने हितों की रक्षा करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में समर्थ है।

इ​सलिए चुना गया हरिद्वार का जंगल
हरिद्वार के जंगल में युद्धाभ्यास को लेकर बताया गया कि यहां एक ही स्थान पर वह सब वातावरण मिला जो हमें युद्ध के दौरान अलग अलग स्थानों पर मिलता है। वहां वातावरण के अनुसार ही सैनिकों को मैदान में उतरना पड़ता है। इसीलिए यहां हमें घना जंगल भी मिला, नदी भी मिली और रेतीला इलाका भी मिला। दिन और रात में तेजी से बदलता तापमान भी यहां अभ्यास में काम आया। भारत जिन मोर्चों पर संभावित युद्ध के लिए तैयार हो रहा है, वे भी ऐसे ही भूभाग हैं। इसीलिए हमारे सैनिक हर परिस्थिति और वातावरण में दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर समय तैयार रहते हैं।