दृष्टि बाधित बच्चों के साथ पढ़ी जानवी की प्रदेश में 16वीं रैंक, सिविल सर्विस है सपना




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न्यूज 127.
तीर्थ नगरी हरिद्वार के एक साधारण परिवार में जन्मी जानवी ने साबित कर दिया कि यदि ठान लिया जाए तो कोई लक्ष्य दूर नहीं होता। जानवी ने हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश की मेरिट में 16वां स्थान प्राप्त किया है। जानवी का सपना बढ़ा होकर सिविल सर्विस में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है।

जानवी के पिता दीपक सप्त सरोवर स्थित परमार्थ आश्रम में इलैक्ट्रिशियन हैं। जानवी अपनी तीन बहनों में सबसे बड़ी है। छोटी बहन भी स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय में कक्षा 9 की छात्रा है। जबकि सबसे छोटी बहन शिशु मंदिर स्कूल में कक्षा दो में पढ़ रही है। स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय में दृष्टि बाधित बच्चे भी पढ़ते हैं। इन्ही बच्चों के साथ पढ़ी जानवी ने 500 में से 480 अंक प्राप्त कर मेरिट में 16 वां स्थान लाकर न केवल अपने माता पिता का बल्कि स्कूल का नाम भी रोशन किया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने भी जानवी को बधाई दी। जानवी की इस उपलब्धि पर स्कूल के संचालक एवं प्रबंधक महंत स्वयंमानंद ने उसके उज्जवल भविष्य की कामना की।
जानवी के पिता दीपक ने बताया कि जानवी को पढ़ने का जुनून है। पढ़ायी के लिए वह बच्चों के साथ खेलना भी पसंद नहीं करती। स्कूल से घर आने के बाद भी वह अधिकतर समय पढ़ने में भी बिताती है। वह बस एक ही बात कहती है कि पापा एक दिन बड़ा अधिकारी बनकर देश की सेवा करूंगी। बेटी के इस जुनून पर माता पिता दोनों को नाज है। उनका कहना है कि बेटी को उसका मकसद दिलाने में वह हर संभव प्रयास करेंगे।

शत प्रतिशत रहा स्कूल का परिणाम
तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय का हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा। विद्यालय के अध्यक्ष महंत स्वयंमानंद ने बताया विद्यालय में 800 बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। जिनमें सामान्य और नेत्रहीन बच्चे शामिल हैं। ये सभी बच्चे साथ-साथ पढ़ते हैं। यह विद्यालय पूर्णतया स्ववित्तपोषित है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। यहां तक कि कॉपी किताबें ड्रेस भी विद्यालय के द्वारा ही प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि इस बार 18 नेत्रहीन बालकों ने हाई स्कूल की परीक्षा दी, जिसमें से छात्र वीर पाल ने 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। शेष नेत्रहीन बालकों ने भी 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि दिव्यंगता, नेत्रहीनता प्रगति के पथ पर बढ़ाने वालों के लिए बाधा नहीं है।