पत्रकार प्रभाकर कुमार मिश्रा ने न्यूज24 को कहा अलविदा








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नई दिल्ली।
देश में अपनी बेबाक और निर्भीक पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर कुमार मिश्रा ने मीडिया संस्थान न्यूज24 से इस्तीफा दे दिया है। करीब 15 वर्षों तक संस्थान से जुड़े रहे मिश्रा ने भावुक शब्दों में अपने इस लंबे सफर को विराम दिया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने पत्रकारिता के दौरान झेले गए अनुभवों, आरोपों और मानसिक संघर्षों को खुलकर सामने रखा। उन्होंने लिखा कि “12 घंटे पहले अच्छा पत्रकार और 12 घंटे बाद घटिया पत्रकार” बना दिया जाना आज के दौर की विडंबना है।
‘सच बोलना आसान नहीं’ — प्रभाकर मिश्रा
प्रभाकर मिश्रा ने अपने संदेश में कहा कि सच के साथ खड़े रहने की कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि अपनी रिपोर्टिंग के कारण उन्हें कई तरह के विशेषणों से नवाजा गया। कभी उन्हें जातिवादी कहा गया, कभी मनुवादी, तो कभी उनके नाम के साथ ‘मदनी’ और ‘खान’ जैसे शब्द जोड़कर संबोधित किया गया।
उन्होंने लिखा कि कई बार उनके ब्राह्मण होने पर सवाल उठाए गए तो कई बार उनके हिंदू होने पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया। सार्वजनिक मंचों पर उन्हें अपमानजनक संबोधन दिए गए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पत्रकारिता की दिशा नहीं बदली।
किसान आंदोलन से लेकर यूजीसी कानून तक रखी बेबाक राय
प्रभाकर मिश्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान कई संवेदनशील मुद्दों पर रिपोर्टिंग की। उन्होंने किसान कानूनों के विरोध पर कहा कि किसानों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी पक्ष का समर्थन नहीं कर रहे थे, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की आवश्यकता पर बल दे रहे थे।
इसी प्रकार यूजीसी कानून पर भी उन्होंने संभावित सामाजिक विभाजन की आशंका जताई थी। उनका मानना था कि किसी भी कानून का प्रभाव समाज में सौहार्द और समरसता को ध्यान में रखकर परखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा कुछ मामलों में दखल दिए जाने से उनकी चिंताओं को बल मिला।
फिल्म विवाद और जातीय पहचान पर उठा विवाद
एक फिल्म के नाम में जातिसूचक शब्द के प्रयोग का विरोध करने पर भी उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि विरोध के आधार पर उन्हें उनकी जाति से जोड़ा गया और विरोधाभासी तरीके से कभी उन्हें ‘मियां’ तो कभी ‘मनुवादी’ कहा गया।
उनका कहना है कि एक ही व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग खांचों में बांटना आज की सामाजिक मानसिकता को दर्शाता है।
मेरा सच, आपका सच अलग हो सकता है’
अपने संदेश के अंत में उन्होंने लिखा, “यह मेरा सच है, हो सकता है आपका सच न हो। लेकिन मेरा सच काफी हद तक सच होता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगे भी सच को सच कहने से पीछे नहीं हटेंगे।
इस्तीफे के साथ उन्होंने कहा कि अब वे अपना आई कार्ड जमा कर देंगे — “नो मोर 24” — लेकिन उनकी पत्रकारिता की यात्रा जारी रहेगी।
पत्रकारिता जगत में चर्चा
प्रभाकर कुमार मिश्रा के इस्तीफे के बाद मीडिया जगत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। 15 वर्षों का उनका सफर कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों और बहसों का साक्षी रहा। अब यह देखना होगा कि उनकी अगली पारी किस मंच से शुरू होती है।