कौन सी है मिठास की भाषा, जानिए पूरी खबर




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उत्तराखण्ड संस्कृति विश्वविद्यालय में अन्तराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन
नवीन चौहान, हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
अन्तराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर बतौर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. दिनेश चन्द्र चमोला ने हिंदी भाषा को मातृभाषा से जोड़ते हुए कहा कि हिन्दी एक मिठास की भाषा है जो भावों को प्रकट करती है। कहाकि जो माता की भाषा है वही भाषा मेरी हुई यानी कि वही मेरी भाषा मातृभाषा हो जाती है। श्री चमोला ने कहा कि आज के समय में भारतवर्ष में हर 50 कोस पर भाषा बदल जाती है। मगर आज के समय में भारतवर्ष में 50 प्रतिशत क्षेत्रिय भाषाएं विलुप्त हो गई हैं, जो कि चिंता का विषय है। कहाकि कई क्षेत्रीय निवासी जो गढ़वाली या कुमांऊनी हैं वह अपनी भाषाओं को छोड़ रहे हैं। जिस कारण उनके अस्तित्व पर भी विलुप्ति का खतरा मंडराने लगा है। श्री चमोला ने कहाकि एक समय में सम्पूर्ण भारतवर्ष में संस्कृत भाषा को ही बोलचाल की भाषा थी मगर आज अन्य भाषाओं ने ने उस पर अतिक्रमण कर लिया है जिससे संस्कृत व उससे जुड़ी भाषाएं खत्म हो रही हैं। कहाकि आज मातृभाषा को बचाने के लिए कई चुनौती हैं। कहा कि मातृभाषा उन्नति का आधार है। जर्मनी, रूस आदि अनेक देशों में अपनी मातृ भाषा को बोलने में सम्मान समझा जाता है, जबकि आज हम अंग्रेजी बोलने में अपना सम्मान समझते हैं। जो हमारी गुलामी की मानसिकता को दर्शाता है। कहाकि किसी भाषा का ज्ञान प्राप्त करना अच्छी बात है, किन्तु मातृभाषा की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। श्री चमोला ने कहा कि अपनी मातृभाषा को बढ़ाने के लिए हमें अपनी मातृभाषा को दैनिक जीवन में उतारना होगा तथा उसे बोलने में संकोच को त्यागना होगा, तभी हम अपनी मातृभाषा को जीवित रख सकते हैं। इस अवसर पर विवि के रजिस्ट्रार गिरीश चन्द्र अवस्थी, प्रो. बिन्दुमती, प्रो. प्रतिभा शुक्ला, सहायक प्रो. धीरज शुक्ला व संस्कृत व अन्य भाषाओं में अपने विचार रखने वाले छात्र-छात्राएं मौजूद थे।