देहरादून।
डीएवी पब्लिक स्कूल देहरादून में महर्षि दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती श्रद्धा, उत्साह और गरिमामयी वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी दयानंद जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की समस्त अध्यापक-अध्यापिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने महर्षि दयानंद के विचारों को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

डीएवी स्कूल के प्रांगण में प्री-प्राइमरी कक्षाओं के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। बच्चों के मधुर एवं शुद्ध मंत्रोच्चार से पूरा विद्यालय परिसर वेदमय हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भावी पीढ़ी महर्षि दयानंद के आदर्शों को आत्मसात कर समाज को नई दिशा देने के लिए तैयार है।
जयंती समारोह का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को सत्य, साहस और समाज सुधार के विचारों से अवगत कराना रहा। अध्यापक-अध्यापिकाओं ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह ग्रंथ न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी संदेश देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय में कक्षा नर्सरी से लेकर नौवीं तक के विद्यार्थियों को स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) प्रदर्शित किया गया। इस वृत्तचित्र के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके समाज सुधार, शिक्षा प्रसार और कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष के विषय में विस्तार से जानकारी मिली। वृत्तचित्र देखने के बाद विद्यार्थी उनके योगदान और बलिदानों के प्रति भावविभोर हो उठे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्ति पूजा, पशु बलि, छुआछूत और सामाजिक असमानता जैसी कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई थी। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं और हमें सामाजिक समरसता व नैतिक मूल्यों की स्थापना हेतु उनके प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए।

इस अवसर पर प्रधानाचार्या श्रीमती शालिनी समाधिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “वेद ही ज्ञान का आधार हैं।” उन्होंने कहा कि डीएवी संस्था में वेदों को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है और विद्यार्थियों को सत्य विद्या की ओर अग्रसर करना ही हमारा उद्देश्य है। उन्होंने सभी छात्रों को एकता, भाईचारे और नैतिकता बनाए रखने तथा महर्षि दयानंद के आदर्शों का अनुसरण करने का संदेश दिया।







