निजी अस्पताल की अमानवीयता आई सामने, SSP नैनीताल की संवेदनशील पहल से पीड़ित परिवार को मिला न्याय








Listen to this article

न्यूज 127.
निजी अस्पतालों में मरीज के इलाज में लापरवाही या अधिक पैसे लेने जैसे आरोप अक्सर लगते रहे हैं, ऐसे में अब एक और शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला नैनीताल जनपद से सामने आया है। यहां उपचार के दौरान एक महिला की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि जमा न होने का हवाला देते हुए शव देने से इनकार कर दिया। इस अमानवीय कृत्य ने न केवल पीड़ित परिवार को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया, बल्कि समाज में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए।

जानकारी के अनुसार दिनांक 03 जनवरी 2026 की रात्रि गोलना करड़िया धारानौला, अल्मोड़ा निवासी नन्दन विरौड़िया पुत्र स्व. डूंगर सिंह बिरौड़िया ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टी.सी. को फोन कर अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी सीमा बिरौड़िया को बेस अस्पताल अल्मोड़ा से रेफर कर चंदन अस्पताल, हल्द्वानी लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

पीड़ित ने SSP को अवगत कराया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और उपचार के लिए पहले ही करीब 57 हजार रुपये अस्पताल को जमा कर चुका है, इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा 30 हजार रुपये और जमा करने की मांग की जा रही थी। राशि न देने की स्थिति में अस्पताल संचालक द्वारा मृतका का शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया गया, जिससे परिवार अंतिम संस्कार तक नहीं कर पा रहा था।

फोन पर पीड़ित की व्यथा सुनकर SSP नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टी.सी. भावुक हो उठे और मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सीओ सिटी हल्द्वानी अमित कुमार तथा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हल्द्वानी विजय मेहता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
पुलिस टीम ने तुरंत चंदन अस्पताल पहुंचकर हस्तक्षेप किया और मृतका के शव को उसके परिजनों के सुपुर्द कराया। साथ ही अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कराया गया, जिससे परिजन धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए भविष्य में इस प्रकार की अमानवीय हरकत न करने की सख्त हिदायत दी।

यह मामला जहां एक ओर निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर SSP नैनीताल की मानवीय और त्वरित कार्रवाई ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस के संवेदनशील चेहरे को भी सामने रखा है। आमजन में इस पहल की सराहना की जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे मामलों पर प्रशासन आगे भी सख्त रुख अपनाएगा।