हरिद्वार–लक्सर रोड पर बढ़ती दुर्घटनाओं के बाद नींद से जागा परिवहन विभाग




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हरिद्वार
हरिद्वार लक्सर रोड़ पर लगातार दुर्घटनाओं के बाद आखिरकार परिवहन विभाग नींद से जाग गया है। सड़क दुघर्टनाओं की रोकथाम के लिए व्लैक स्टॉप को चिंहित किया जा रहा है। वाहनों की स्पीड पर अंकुश लगाने के साथ ही ब्लिंकर लाइटें, रंबल स्ट्रिप्स और ट्रैफिक-कैल्मिंग उपायों की आवश्यकता महसूस की गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग–334 के हरिद्वार–फेरुपुर खंड पर परिवहन विभाग, पुलिस विभाग और लोक निर्माण विभाग (एनएच डिवीजन) की संयुक्त टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया। इस संयुक्त टीम में परिवहन विभाग से निखिल शर्मा (एआरटीओ प्रशासन), नेहा झा (एआरटीओ प्रवर्तन) तथा रविंद्र पाल सैनी (परिवहन कर अधिकारी, गोवर्धनपुर), संदीप नेगी (ट्रैफिक इंस्पेक्टर, हरिद्वार) और लोक निर्माण विभाग एनएच डिवीजन से मनु सिंह (सहायक अभियंता) शामिल रहे।


एआरटीओ निखिल शर्मा ने बताया कि सड़क सुरक्षा की वास्तविक स्थिति, ट्रै
फिक दबाव और दुर्घटना संभावित स्थानों का विस्तृत मूल्यांकन करने के लिए निरीक्षण किया गया है।
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि देशरक्षक तिराहा, बूढ़ी माता मंदिर तिराहा, राजा गार्डन तिराहा, मैंगो फार्म एस-बेंड तथा जिया-पोता क्षेत्र में यातायात का दबाव अत्यधिक है। यहां दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु ब्लिंकर लाइटें, रंबल स्ट्रिप्स और ट्रैफिक-कैल्मिंग उपायों की आवश्यकता महसूस की गई।
मार्ग के आबादी वाले हिस्सों में कई स्थानों पर अतिक्रमण भी देखा गया, जिससे वाहनों की आवाजाही बाधित होती है और दुर्घटना जोखिम बढ़ता है। इस संबंध में सड़क सुरक्षा समिति से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
टीम ने मार्ग पर क्षतिग्रस्त मीडियन मार्किंग, कैट-आईज, डिलिनेटर्स और आवश्यक ट्रैफिक संकेतकों की अनुपस्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। स्कूलों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास चेतावनी संकेत, स्पीड लिमिट बोर्ड और स्कूल-अग्रिम सूचना चिह्न तत्काल लगाए जाने की जरूरत बताई गई।
उन्होंने बताया कि दिन के समय भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ते जाम और सुरक्षा जोखिम को देखते हुए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध (No Entry) लागू करने की अनुशंसा करने का निर्णय लिया है। निरीक्षण से जुड़े सभी बिंदु और सुझाव आगामी सड़क सुरक्षा समिति बैठक में प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि आवश्यक सुधारात्मक कदम शीघ्रता से लिए जा सकें।