देहरादून।
शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा के अधिकार योजना के तहत फीस प्रतिपूर्ति के मामलों में रिश्वतखोरी का खुलासा किया है। सतर्कता टीम ने उप शिक्षा अधिकारी स्तर के अधिकारी सहित दो लोगों को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरटीई के तहत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के बिल पास कराने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सतर्कता सेक्टर देहरादून को मिली थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने इसकी गोपनीय जांच कराई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद ट्रैप टीम का गठन कर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
निर्धारित योजना के तहत 1 अप्रैल को सतर्कता टीम ने जाल बिछाया। ट्रैप के दौरान डोईवाला में तैनात उप शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट और उनकी सहयोगी पुष्पांजलि को शिकायतकर्ता से 1,00,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। टीम ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा यह रिश्वत राशि ऋषिकेश स्थित गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल में अध्ययनरत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के बिलों को पास कराने के एवज में मांगी गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा इसकी सूचना सतर्कता विभाग को दी गई थी, जिसके बाद यह सफल कार्रवाई संभव हो सकी।
कार्रवाई के उपरांत दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। सतर्कता विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है और अधिकारियों व कर्मचारियों में सतर्कता बढ़ गई है। वहीं, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को भी दर्शाती है, जिससे आम जनता में विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
उप शिक्षा अधिकारी सहित दो अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार




