नवीन चौहान
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में आयोजित वैदिक चेतना सम्मेलन में महाभारत के युद्ध की नृत्य नाटिका का मंचन हुआ। स्कूल के प्रतिभावान बच्चों ने भगवान कृष्ण से लेकर कर्ण के किरदारों को बखूवी निभाया। पांचों पांडव ने दुर्योधन की सेना को परास्त कर दिखाया। बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को देखकर अभिभावकों ने खूब तालियां बजाई। महाभारत की नृत्य नाटिका को तैयार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शिक्षिका पूनम गक्खड़ और दीपमाला शर्मा के कार्य को सराहा गया।
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर शिक्षा के साथ, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सदैव अग्रणी रहता है। इसी के चलते डीएवी स्कूल के बच्चों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़कर रखने के लिए वैदिक चेतना सम्मेलन का आयोजन प्रतिवर्ष कराया जाता है। इस वर्ष का कार्यक्रम 9 और 10 नवंबर 2022 को आयोजित हुआ। डीएवी स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य मनोज कपिल ने मिडिल विंग की इंचार्ज हेमलता पांडेय और प्राइमरी विंग की इंचार्ज कुसम बाला त्यागी के साथ वैदिक चेतना सम्मेलन की तैयारियों को मूर्तरूप प्रदान किया और कार्यक्रमों का निर्धारण किया। उत्तराखंड जोन के एआरओ और पूर्व प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित के निर्देशन में वैदिक चेतना सम्मेलन के आयोजन की सभी तैयारियां पूरी की गई। करीब चार हजार अभिभावकों के बैठने और करीब 950 बच्चों को मंच प्रदान करने के लिए कार्यक्रम तैयार किए गए। स्कूल की नृत्य शिक्षिका दीपमाला शर्मा ने बच्चों के कार्यक्रमों की सभी तैयारियां पूरी कराई। एलईडी स्क्रीन की व्यवस्थाओं को कंप्यूटर शिक्षक वरूण ने संभाला। प्रमुख रूप से महाभारत कार्यक्रम को सराहा गया।
अभिभावक और वरिष्ठ पत्रकार नवीन पांडेय ने कहा कि डीएवी स्कूल शिक्षा के साथ—साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से बच्चों को जोड़कर रखता है। वैदिक चेतना सम्मेलन में महाभारत का चिरण बेहद ही खूबसूरत और आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों के भीतर छिपे कलाकार की प्रतिभा में निखार आया है।
वैदिक चेतना सम्मेलन के आयोजन को सफल बनाने में शिक्षिका अर्चना तलेगांवकर, अनीता स्नातिका, दीपमाला शर्मा, पूनम गक्खड़, हिमांशु गुप्ता और स्कूल के सभी शिक्षक, शिक्षिकाओं, चतुर्थश्रेणी स्टॉफ का सहयोग रहा। जबकि प्रसाद वितरण में सुनील कुमार गुप्ता व रवि शर्मा ने अपनी जिम्मेदारी को बखूवी निभाया।
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद खास ख्याल रखा गया। स्कूल के शिक्षक अलर्ट रहा। बच्चों को स्टेज पर लाना, तैयार कराया और उनके अभिभावकों के सुपुदर्गी में जिम्मेदारी बरती गई। जबकि बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त इंतजाम किए गए। स्कूल गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन किया।




