हरिद्वार की सियासत में नए समीकरण: क्या बदलेगा 2027 का खेल ?








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न्यूज127, हरिद्वार।
उत्तराखंड की राजनीति में जैसे-जैसे साल 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। खासकर हरिद्वार जनपद की 11 विधानसभा सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रणनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इस पूरे परिदृश्य में मदन कौशिक का बढ़ता सियासी कद और प्रदीप बत्रा की संभावित भूमिका चर्चा के केंद्र में है।

मदन कौशिक का बढ़ता प्रभाव
कैबिनेट मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मदन कौशिक एक बार फिर हरिद्वार की राजनीति में केंद्रीय भूमिका में नजर आ रहे हैं। संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की उनकी क्षमता ने उन्हें पार्टी हाईकमान के करीब ला दिया है। वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी के मुताबिक, आगामी चुनाव में उम्मीदवार चयन से लेकर रणनीति निर्धारण तक उनकी अहम भूमिका हो सकती है। हरिद्वार की 11 सीटों पर भाजपा को मजबूत स्थिति में लाने के लिए मदन कौशिक को ‘फ्रंटलाइन कमांडर’ के रूप में जिम्मेदारी दी जा सकती है। ब्राहृाण वोटरों के साथ ही मदन कौशिक का सियासी अनुभव फायदेमंद साबित होगा।

प्रदीप बत्रा पर बढ़ी जिम्मेदारी
रुड़की से तीन बार के विधायक प्रदीप बत्रा पर भी पार्टी की नजरें टिकी हुई हैं। पिछले चुनावों में उनके प्रदर्शन और क्षेत्रीय पकड़ को देखते हुए उन्हें धामी केबिनेट में जगह दी गई हैं। निश्चित तौर पर पंजाबी वोटरों में खुशी का माहौल है। ऐसे में रुड़की सहित आसपास की सीटों पर भाजपा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी का मानना है कि प्रदीप बत्रा अपने जनसंपर्क और संगठन क्षमता को और धार देते हैं, तो 2027 में भाजपा के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।

आदेश चौहान को क्यों किया गया दरकिनार ?
हरिद्वार की सियासत में एक बड़ा सवाल यह भी है कि आदेश चौहान को हालिया राजनीतिक गतिविधियों में अपेक्षाकृत कम तवज्जो क्यों मिल रही है। आदेश चौहान तीन बार के विधायक है। क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव
और पार्टी के भीतर नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति के चलते उनको केबिनेट में जगह बनाने में कामयाब नही हो पाए।
हालांकि, भाजपा में अंतिम निर्णय हाईकमान के स्तर पर होता है, इसलिए भविष्य में समीकरण बदलना भी असंभव नहीं है।

2027 के लिए भाजपा की रणनीति
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की रणनीति के तहत ही हरिद्वार जनपद की 11 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए भाजपा ने कई स्तरों पर काम शुरू कर दिया है। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की रणनीति पर कार्य शुरू हो चुका है। धामी सरकार के चार साल के विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाना प्रमुख होगा।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि पार्टी आंतरिक गुटबाजी को नियंत्रित कर लेती है, तो हरिद्वार में बड़ा प्रदर्शन संभव है।
क्या भाजपा करेगी ‘क्लीन स्वीप’?
हरिद्वार की 11 सीटें हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रही हैं। यहां जातीय और क्षेत्रीय समीकरण काफी प्रभाव डालते हैं। ऐसे में मदन कौशिक की रणनीति, प्रदीप बत्रा की सक्रियता और अन्य नेताओं का सामंजस्य ही तय करेगा कि भाजपा 2027 में ‘कमाल’ कर पाएगी या नहीं।
फिलहाल इतना तय है कि हरिद्वार की सियासत में आने वाले महीनों में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, और सभी की नजरें भाजपा की अगली चाल पर टिकी हैं।