नवीन चौहान, हरिद्वार। डबल इंजन की त्रिवेंद्र सरकार के एक साल में कोई खास उपलब्धि तो नहीं रही लेकिन हां फूलों की ब्रिकी जरूर बढ़ी है। सरकारी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री का सम्मान फूलों से करने का चलन बढ़ गया। सरकारी विभागों के कार्यक्रमों में उपहार परंपरा बंद हो गयी वहां भी फूलों के गुलदस्ते उपहार स्वरूप दिये जाने लगे। पूरे साल में फूलों की मांग बढ़ी रही। फूल सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। फूल ही सही मंहगे उपहार खरीदने के खर्च से तो आयोजकों को मुक्ति मिल गई है।
साल 2017 के विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के उत्तराखंड में तूफानी दौरों से सत्ता परिवर्तन हुआ। कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर भाजपा प्रचंड बहुमत से उत्तराखंड की सत्ता पर काबिज हुई। प्रदेश के मुखिया की कमान सरल व्यक्तित्व वाले संघ से जुड़े त्रिवेंद्र सिंह रावत को हाथों में आ गई। डबल इंजन की सरकार के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड में जीरो टालरेंस की मुहिम शुरू की। उन्होंने सरकारी कार्यक्रमों के आयोजनों में गिफ्ट परंपरा को बंद कर दिया। जिसके बाद फूल देने का चलन शुरू हो गया। जिसके बाद से उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह जिस भी कार्यक्रम में जाते हैं उनको फूल देकर सम्मानित किया जाने लगा। हालांकि इससे इतर बात करें तो पूरे साल भर सरकार खनन और आबकारी नीति पर ही उलझी रही। उत्तराखंड प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व खनन और आबकारी विभाग से ही मिलता है। इन दोनों विभागों में भी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई। एक साल में सरकार दो मंत्री पद तक नहीं भर पाई। प्रचंड बहुमत की त्रिवेंद्र सरकार का एक साल फूलों के चलन के लिये याद किया जायेगा।
फूलों के नाम रहा त्रिवेंद्र सरकार का एक साल, जानिए पूरी खबर


