न्यूज 127, देहरादून
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने उत्तराखण्ड में शासन की परिभाषा ही बदल दी है। यह कार्यक्रम अब केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह, संवेदनशील और सक्रिय प्रशासन का सशक्त प्रतीक बन चुका है।
प्रदेश की सरकार अब सचिवालय और कार्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर गांव, हर गली और हर जरूरतमंद के द्वार तक स्वयं पहुँच रही है। 27 दिसंबर 2025 तक प्रदेश के 13 जनपदों में 135 शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें 74,087 से अधिक नागरिकों के आवेदन मौके पर ही प्राप्त हुए। प्रशासनिक तत्परता का प्रमाण यह रहा कि 8,408 आवेदनों का तत्काल निस्तारण किया गया। इसके साथ ही 13,934 प्रमाण पत्र जारी किए गए और 47,878 नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया।
यह अभियान महज कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत अब अधिकारी जनता को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगवा रहे, बल्कि समस्या तक स्वयं पहुँचकर समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा— “मेरे लिए शासन का अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि जनता की समस्या को समझकर उसका त्वरित समाधान करना है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से हमने यह सुनिश्चित किया है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक शासन से वंचित न रहे। अधिकारी अब फाइलों में नहीं, बल्कि मैदान में दिखाई देने चाहिए। उत्तराखण्ड में शासन अब सत्ता का नहीं, सेवा का माध्यम है।”
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक योजनाओं का लाभ अनिवार्य रूप से पहुँचे। बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए घर-घर समाधान सुनिश्चित किया जाए। शिविरों में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
जन-जन के द्वार पहुंची सरकार, धामी मॉडल ने रचा सुशासन का नया इतिहास



