हरिद्वार।
हरिद्वार में गोरखाली महिला कल्याण समिति की ओर से वनभोज एवं सांस्कृतिक महोत्सव का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। बैरागी कैंप स्थित कार्यक्रम स्थल पर आयोजित इस महोत्सव में गोरखाली समाज की एकता, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में हरिद्वार सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गोरखाली महिलाएं और पुरुष शामिल हुए, जिससे आयोजन उत्सवधर्मी माहौल में परिवर्तित हो गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सुभाष घाट व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजू वधावन रहे। दीप प्रज्वलन के साथ सरस्वती वंदना और गणेश वंदना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। झली को झलल, सुरके थैली, माईती घर, टाकन टुकन, चींटीकै भाछुरे, मत ढले ढले, गौरखे खुकुरी, साल को पात टपरी और कुटुम कुटुम सुपारी दाना जैसे लोकगीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों ने गोरखाली संस्कृति की जीवंतता को मंच पर साकार कर दिया।
इस अवसर पर महिलाओं को पारंपरिक गोरखाली भोजन भी कराया गया, जिससे आयोजन की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त हुई। कार्यक्रम को पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं और सकारात्मक सामाजिक चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वनभोज गोरखाली समाज की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है, जिसे भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
विशिष्ट अतिथि राजू वधावन ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण को मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने गोरखाली महिला कल्याण समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी समाज को नई दिशा देती है।
महिला कल्याण समिति की अध्यक्ष पदमा पाण्डेय और महामंत्री शारदा सुबेदी ने कहा कि समिति लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वनभोज जैसे पर्व महिलाओं की आस्था, श्रद्धा और पारिवारिक एकता का प्रतीक हैं, जो समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।
कमला सुबेदी और रेखा सुबेदी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से महिलाओं को अपनी संस्कृति को खुलकर व्यक्त करने का अवसर मिलता है और आपसी मेलजोल बढ़ता है। वहीं पदम प्रसाद सुबेदी और लोकनाथ सुबेदी ने कहा कि वनभोज एवं सांस्कृतिक महोत्सव समाज में पर्यावरण संरक्षण, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।
कार्यक्रम में हरिद्वार के अलावा देहरादून, रायवाला, ऋषिकेश, डोईवाला, रुड़की, छिदरवाला, मोतीचूर और गाजीवाला से सैकड़ों गोरखाली समाज के लोग शामिल हुए। आयोजन में आचार्य स्वामी रवि देव शास्त्री, स्वामी हरिहरानन्द महाराज, महंत दिनेश दास, सुतिक्षणमुनि महाराज सहित अनेक संत, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
वनभोज व सांस्कृतिक महोत्सव में झलकी गोरखाली समाज की एकता, परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि



