हरिद्वार और उधमसिंहनगर में दुर्घटनाएं घटीं, मृत्यु और घायलों की संख्या बढ़ी




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हरिद्वार
राज्य के तीन प्रमुख और सर्वाधिक यातायात दबाव वाले जनपद—देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंहनगर—में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े थोड़ी राहत लेकिन बेहद चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। परिवहन आयुक्त कार्यालय द्वारा आईआरएडी पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 तक इन जनपदों में दुर्घटनाओं की संख्या में कुछ कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद मृतकों और घायलों की संख्या में वृद्धि ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देहरादून में वर्ष 2024 में जहां 470 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 408 रह गई, जो लगभग 13.19 प्रतिशत की कमी दर्शाती है। इसके बावजूद मृतकों की संख्या 185 से बढ़कर 206 हो गई, यानी 11.35 प्रतिशत की वृद्धि। घायलों की संख्या भी 406 से घटकर 380 हुई है, लेकिन मौतों में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि हादसों की गंभीरता बढ़ी है। तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही और शहरी विस्तार को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है।
हरिद्वार जनपद में भी इसी तरह के आंकड़े देखने को मिले है। वर्ष 2024 में 400 दुर्घटनाओं की तुलना में 2025 में यह संख्या घटकर 369 हो गई, यानी 7.75 प्रतिशत की कमी। हालांकि मृतकों की संख्या लगभग स्थिर रहते हुए 256 से 257 पहुंच गई। वहीं घायलों की संख्या 324 से बढ़कर 365 हो गई, जो 12.65 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। धार्मिक पर्यटन, भारी भीड़, राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज गति और नियमों की अनदेखी यहां हादसों की बड़ी वजह बन रही है।
उधमसिंहनगर में भी दुर्घटनाओं की संख्या में हल्की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में 384 दुर्घटनाओं की तुलना में 2025 में 372 दुर्घटनाएं हुईं, जो 3.13 प्रतिशत की गिरावट है। इसके बावजूद मृतकों की संख्या 243 से बढ़कर 264 हो गई, यानी 8.64 प्रतिशत की वृद्धि, जबकि घायलों की संख्या 299 से बढ़कर 336 पहुंच गई, जो 12.37 प्रतिशत अधिक है। औद्योगिक क्षेत्र, तेज रफ्तार भारी वाहन और हाईवे नेटवर्क पर बढ़ता दबाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
यातयात विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों जनपदों में दुर्घटनाओं की संख्या में कमी प्रशासनिक प्रयासों का संकेत है, लेकिन हादसों की गंभीरता बढ़ना यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। ब्लैक स्पॉट सुधार, गति नियंत्रण, सख्त प्रवर्तन और जनजागरूकता अभियानों के बिना सड़क हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।
दूसरी ओर, पर्वतीय जनपदों की स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी, बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल में सड़क दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है। चमोली में दुर्घटनाएं 125 प्रतिशत और मृतक 238 प्रतिशत तक बढ़े हैं, जबकि रुद्रप्रयाग में दुर्घटनाओं में 158 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नैनीताल में घायलों की संख्या में 175 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने पर्वतीय सड़कों की खस्ताहाल स्थिति को उजागर कर दिया है।
पर्वतीय जनपदों में सड़क सुधार, सुरक्षा रेलिंग, चेतावनी संकेत और ड्राइवर प्रशिक्षण जैसे उपायों को प्राथमिकता देनी होगी। अन्यथा उत्तराखंड में सड़क हादसों का यह बढ़ता ग्राफ आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकता है।

हरिद्वार एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा ने बताया कि जागरूकता अभियान लगातार जारी है। जनता को वाहनों की स्पीड पर नियंत्ररण रखने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। यातायात नियमों का पालन करने से भी काफी हद तक दुर्घटनाओं में कमी आती है। ऐसे में सभी नागरिकों को वाहन चलाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।