HARIDWAR हरिद्वार–ऋषिकेश रोपवे होगा अत्याधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण–अनुकूल




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न्यूज127
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी विजन अब धरातल पर आकार लेने लगे है। उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं केवल आवागमन का साधन नहीं होंगी, बल्कि यह आस्था, पर्यटन और आधुनिक तकनीक का एक सशक्त संगम होंगी। हरिद्वार, ऋषिकेश और पर्वतीय क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह रोपवे नेटवर्क विश्वस्तरीय तकनीक पर आधारित, पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण–अनुकूल होगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सहज, तेज और आरामदायक यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा।
प्रस्तावित रोपवे प्रणाली आधुनिक एरियल केबल कार टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी, जिसे विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें हाई–टेंशन स्टील केबल पर चलने वाले स्वचालित केबिन लगाए जाएंगे, जो निर्धारित स्टेशनों के बीच लगातार आवाजाही करेंगे। यह प्रणाली सड़क यातायात से पूरी तरह अलग होगी, जिससे जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं की आशंका न्यूनतम रहेगी।
रोपवे के केबिन पूर्णतः मजबूत और आरामदायक होंगे। प्रत्येक केबिन में बैठने और खड़े होकर यात्रा करने की सुविधा होगी, ताकि पीक सीजन में अधिक श्रद्धालुओं को आसानी से ले जाया जा सके। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केबिनों में आसान प्रवेश–निकास व्यवस्था, ग्रैब हैंडल और सुरक्षा सेंसर लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम, बैकअप पावर सप्लाई और 24×7 मॉनिटरिंग की व्यवस्था रहेगी।
हरिद्वार के हरकी पौड़ी और ऋषिकेश–नीलकंठ जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे को मल्टी–मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसका अर्थ यह होगा कि रोपवे स्टेशन बस टर्मिनल, पार्किंग स्थल और पैदल मार्गों से सीधे जुड़े होंगे, जिससे श्रद्धालुओं को बार–बार वाहन बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और श्रद्धालु सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए रोपवे परियोजना में न्यूनतम भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। पहाड़ों की कटाई और जंगलों पर प्रभाव को कम से कम रखते हुए टावरों की स्थापना की जाएगी। इलेक्ट्रिक सिस्टम होने के कारण यह परियोजना कार्बन उत्सर्जन रहित होगी, जिससे गंगा घाटी और हिमालयी पारिस्थितिकी को संरक्षण मिलेगा।
सरकार का मानना है कि यह रोपवे नेटवर्क भविष्य में हरिद्वार–ऋषिकेश क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित, स्मार्ट और तीर्थ–पर्यटन हब के रूप में विकसित करेगा। आस्था की राह को सुगम बनाते हुए यह रोपवे परियोजना उत्तराखंड के आधुनिक बुनियादी ढांचे की एक नई पहचान होगी।