नवीन चौहान.
माँ धरती पर ईश्वर का ही रूप है। माताओं के प्रति अपने सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करते हुए आज डीएवी जगजीतपुर, हरिद्वार में नन्हें-मुन्ने विद्यार्थियों ने मातृ दिवस बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया।

कार्यक्रम में मूलभूत चरण (फाउण्डेशनल स्टेज) के बच्चों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि मुख्य शिक्षाधिकारी के0के0 गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल ने मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ तथा ऋग्वेद की प्रति देकर किया।

सर्वप्रथम कक्षा दो के बच्चों ने आगंतुकों का स्वागत एक सुन्दर स्वागत नृत्य के माध्यम से किया। उसके बाद एल-के.जी. के छोटे-छोटे बच्चों ने ‘तू कितनी प्यारी है’ गीत पर नृत्य कर अपने अभिभावकों का मन मोह लिया।

कक्षा यू-के.जी. के बच्चों ने माता-पिता के संदर्भ में गीत के भावुक बोल पर नृत्य कर सभी की आँखें सजल कर दी। मां के प्यार को देखकर लगता है कि जैसे इनसे हमारा जन्म-जन्मांतर का नाता है। तेरा मुझे है पहले का नाता कोई गीत पर कक्षा एक के विद्यार्थियों ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित अभिभावकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।

कक्षा 2 के विद्यार्थियों द्वारा प्राचीन शैलियों को पुनर्जीवित करता हुआ एक नृत्य रेट्रो (RETRO) प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में न केवल बच्चों ने अपितु अभिभावकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

रैम्प वाक के दौरान अभिभावकों ने भारत के विभिन्न प्रदेशों की वेशभूषा एवं भाषा के माध्यम से भारतदर्शन कराया।

रैम्प वाक में केशव वर्मा और उसके माता-पिता सुरभि वर्मा और दीपांकर वर्मा (राजस्थान) को प्रथम पुरस्कार, मायरा शर्मा और उसकी माता शिवानी शर्मा (उत्तराखण्ड) को द्वितीय पुरस्कार, फतेहवीर सिंह और उसकी माता जसप्रीत कौर (पंजाब) को तृतीय पुरस्कार तथा ज़ोरावर सिंह और उसकी माता गगनप्रीत कौर (पंजाब) को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

नन्हें-नन्हें बच्चों की सुन्दर प्रस्तुतियों को सभी के द्वारा सराहना मिली। प्रधानाचार्य ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि हमारी पहली शिक्षक माँ होती है, माँ से हम सम्पूर्ण जीवन सीखते हैं, माँ के जीवन में बच्चे की अहमियत जैसे उसके जन्म के समय होती है, बड़े होने के बाद भी वैसी ही रहती है। हमें पैदा करने वाली तो माँ है, लेकिन हमारी दादी, नानी भी हमारी माँ हैं, हरिद्वार की माँ मनसा और गंगा भी हमारी माँ है।

अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होनें कहा कि माता-पिता बच्चों के लिए उनके आदर्श होते हैं, यदि वे सही मार्ग पर चलते हैं तो बच्चा स्वयं संस्कारवान बन जाता है। प्रकाश के लिए दीए को स्वयं जलना पड़ता है।

बच्चे का भविष्य बनाने के लिए माता-पिता जी-जान से प्रयास करते हैं। माँ की गोद से उतर कर बच्चा विद्यालय में ज्ञानार्जन करने आता है। विद्यालय में शिक्षक किस प्रकार बच्चों को विभिन्न प्रकार की शिक्षा देने का प्रयास करते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से दर्शाने का प्रयास डीएवी विद्यालय द्वारा किया गया।

मुख्यातिथि के.के. गुप्ता ने कहा कि विद्यालय द्वारा तीन से सात साल के छोटे-छोटे बच्चों की प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दर्शाया गया कि विद्यालय में शिक्षा का माध्यम केवल किताबें ही नहीं हैं, बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का होते रहना आवश्यक होता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को अपने बच्चों की तरह ही विकसित कर राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में सुपरवाइज़री हैड कुसुम बाला त्यागी ने इस अवसर पर सभी उपस्थित अभिभावकों को धन्यवाद देते हुए बच्चों उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होने के कहा यह विद्यालय का छोटा सा प्रयास है कि सभी बच्चे आरम्भ से विद्यालय द्वारा कराई जा रही गतिविधियों में प्रतिभाग करें, जिससे उनकी प्रतिभा दिनोंदिन निखरती रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मिडल विंग की सुपरवाइजरी हैड हेमलता पांडे, नृत्य शिक्षिका दीपमाला शर्मा का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर विंग के अन्य सभी अध्यापक-अध्यापिकाएं उपस्थित थे। जल-पान के उपरांत कार्यक्रम का समापन हुआ।





