प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की अलख, 4.71 लाख पायरेटेड पुस्तकें और 20 करोड़ की मशीनरी जब्त: सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत












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नई दिल्ली।
लोकसभा में हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा एनसीईआरटी की पायरेटेड पाठ्यपुस्तकों को लेकर पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने एनसीईआरटी की पायरेटेड पुस्तकों पर रोक लगाने हेतु किए गए विशेष अभियान और उसके सकारात्मक परिणामों की जानकारी दी।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने बताया कि वर्ष 2024 और 2025 में देश के विभिन्न राज्यों में पायरेसी पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए। इस अभियान के दौरान 4.71 लाख से अधिक पायरेटेड एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें जब्त की गईं, जो अवैध तत्वों के व्यावसायिक हितों के कारण हो रही पायरेसी के खिलाफ कड़ा संदेश है। इस अवैध व्यापार ने न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री से वंचित किया, बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया।

उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में पायरेटेड पुस्तकें बनाने और बेचने वालों के 29 परिसरों पर छापेमारी की गई, जिसमें लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य के स्टॉक और मशीनरी जब्त की गई। यह कार्रवाई शिक्षा के प्रति सरकार की शून्य सहनशीलता नीति को दर्शाती है।

पाठ्यपुस्तकों की कीमत में 20% की कमी करना, कागज और मुद्रण की गुणवत्ता में सुधार करना, और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा देना जैसे कदम भी उठाए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को सस्ती और बेहतर शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

इसके अतिरिक्त, आईआईटी कानपुर द्वारा विकसित तकनीक आधारित एंटी-पायरेसी समाधान का पायलट परीक्षण कक्षा 6 की 10 लाख पुस्तकों पर किया गया है, जो पायरेसी को रोकने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है। यह तकनीक आगे व्यापक स्तर पर लागू की जाएगी।

इन दूरदर्शी प्रयासों के परिणामस्वरूप एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो वर्ष 2023-24 में 232 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 526 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह न केवल इस अभियान की सफलता को दर्शाता है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और विश्वास की बहाली का भी प्रमाण है।

सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की इस कठोर और प्रभावी कार्रवाई की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के हितों से समझौता करने वालों के लिए देश में कोई जगह नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि आईआईटी कानपुर के तकनीक आधारित एंटी-पायरेसी समाधान और पाठ्यपुस्तकों की कीमत में कमी जैसी पहलें न केवल पायरेसी पर लगाम लगाएंगी, बल्कि व्यापक स्तर पर शिक्षा की पहुँच और गुणवत्ता को बेहतर बनाएंगी। यह कदम विद्यार्थियों को अधिक सस्ती, प्रमाणिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगा।

सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सरकार से अपील की कि ऐसे अभियान लगातार जारी रखें जाएं ताकि शिक्षा के क्षेत्र में पायरेसी और अवैध व्यापार की पूरी तरह समाप्ति हो सके और देश का हर विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।