नैनीताल।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शासन की प्राथमिकता अब केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके ठोस और संवेदनशील ज़मीनी असर पर केंद्रित हो गई है। इसी दूरदर्शी सोच का सशक्त उदाहरण कुमाऊँ परिक्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहाँ पुलिसिंग का चेहरा भय से भरोसे की ओर बदलता दिखाई दे रहा है।
कुमाऊँ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रिद्धिम अग्रवाल के नेतृत्व में डायल 112 जैसी आपातकालीन सेवा को अब केवल “रिस्पॉन्स सिस्टम” नहीं, बल्कि “पीड़ित-संतुष्टि आधारित सेवा” के रूप में विकसित किया गया है। स्पष्ट निर्देश हैं कि तेज़ रिस्पॉन्स ही नहीं, बल्कि पीड़ित की वास्तविक संतुष्टि ही पुलिस कार्रवाई की असली कसौटी होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विज़न है कि शासन की सफलता योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि जनता के अनुभव और भरोसे से तय होती है। इसी सोच के अनुरूप पुलिस व्यवस्था को कानून-व्यवस्था से आगे बढ़ाकर जन-सेवा, संवेदनशीलता और संवैधानिक उत्तरदायित्व से जोड़ा गया है। कुमाऊँ में डायल 112 की बदली हुई कार्यप्रणाली इसी विज़न का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।
हर सूचना पर बनेगा “रिपोर्ट कार्ड”
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देशों पर अब कुमाऊँ में हर पुलिस सूचना की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है। कोई भी नागरिक पुलिस को सूचना देता है तो उस पर क्या कार्रवाई हुई, कितनी देर में हुई और पीड़ित कितना संतुष्ट है—इन सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी। सूचना मिलने के बावजूद लापरवाही या टालमटोल पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध कार्रवाई तय मानी जाएगी। इससे एक ओर जहाँ जनता का भरोसा खाकी पर और मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर पुलिस को हर सूचना पर ठोस परिणाम देना अनिवार्य होगा।
डायल 112 : अब आपातकालीन नंबर नहीं, जनता का भरोसा
कुमाऊँ परिक्षेत्र में डायल 112 सेवा अब महज़ कॉल “निस्तारण” तक सीमित नहीं है। हर गंभीर कॉल के बाद वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा, कार्रवाई के उपरांत पीड़ित से सीधा फीडबैक और लापरवाही पाए जाने पर तत्काल जवाबदेही तय की जा रही है। महिला, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता सर्वोपरि रखते हुए शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है।
गंभीर मामलों पर विशेष निगरानी
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देशों पर सितंबर से 31 दिसंबर 2025 तक हत्या, महिला अपराध, लूट, एससी/एसटी, मानव तस्करी, स्नैचिंग और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों में विशेष फीडबैक सिस्टम लागू किया गया।
इन चार महीनों में कुल 3432 गंभीर कॉल दर्ज की गईं, जिनमें महिला अपराध से संबंधित 3016, मानव तस्करी 216, वरिष्ठ नागरिक 87, स्नैचिंग 76, हत्या 10, लूट 13 और एससी/एसटी से जुड़े 14 मामले शामिल रहे। ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि कुमाऊँ पुलिस सिर्फ़ कॉल नहीं गिन रही, बल्कि हर कॉल के पीछे खड़े इंसान को प्राथमिकता दे रही है।
मैदान से भरोसे के जीवंत उदाहरण
हरियाणा से घूमने आई महिला के साथ 8 दिसंबर 2025 को हुई मारपीट की घटना पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। बाद में पुलिस कंट्रोल रूम से पीड़िता से फीडबैक लिया गया, जिस पर उन्होंने उत्तराखण्ड पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई पर संतोष जताया।
नशे की गिरफ्त में फंसे एक युवक के मामले में पुलिस ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए परिवार की मदद की और युवक को नशा मुक्त कराने की दिशा में प्रयास शुरू किए, जिससे परिवार का भरोसा और मजबूत हुआ।
चम्पावत में सड़क दुर्घटना की सूचना पर पुलिस ने घायल को तत्काल रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया और परिजनों को सूचित कर मानवता और कर्तव्य का उदाहरण पेश किया।
11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म प्रयास के मामले में हाईवे पेट्रोलिंग की सतर्कता से आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया गया, वहीं वरिष्ठ नागरिकों की सहायता में पुलिस ने सूचना मात्र पर अस्पताल पहुंचाकर करुणा का परिचय दिया।
सख़्ती और संवेदनशीलता का संतुलन
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के नेतृत्व में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि आपातकालीन सेवाओं में कोई समझौता नहीं होगा, पीड़ित से संवाद ही पुलिस की असली परीक्षा है और जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और आईजी की ज़मीनी निगरानी ने कुमाऊँ को विश्वास-आधारित पुलिसिंग का मॉडल बना दिया है, जहाँ खाकी अब सिर्फ़ कानून की प्रतीक नहीं, बल्कि सुरक्षा, संवेदना और भरोसे की पहचान बनती जा रही है।
आईजी रिद्धिम अग्रवाल की निगरानी में बदला कुमाऊँ पुलिस का चेहरा







