नवीन चौहान
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के मानव चेतना एवं योग विज्ञान के हॉल में 10 दिवसीय टिचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम फॉर फार्नर्स का विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सुरेन्द्र कुमार ने यज्ञ करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कुलपति डा सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि योग हमारी सांस्कृतिक विरासत है। प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि मुनियों ने इस विद्या को पल्लवित किया हैं। इस कला का हस्तान्तरण भारत द्वारा विदेशों में किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में भारतीय का प्राचीनतम विश्वविद्यालय गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने सबसे पहले इस विषय का शुभारम्भ शैक्षिक स्तर पर किया है। चाईना से योग सीखने आए हुए प्रतिभागियों ने योग के गुर को सीखा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विदेशी प्रतिभागियों के लिए वर्ष में दो बार यह प्रशिक्षण किया जाता है। प्रशिक्षण पूरी तरह सैद्धान्तिक प्रक्रियाओं के द्वारा दिया जाता है। इस प्रशिक्षण को ग्रहण कर विदेशी प्रतिभागी अपने-अपने शहरों में योग का प्रशिक्षण केन्द्र संचालित कर रहे हैं। संकायाध्यक्ष प्रो ईश्वर भारद्वाज ने कहा कि इस कार्यक्रम में हठयोग, पातंजल योग, स्वास्थ्य प्रबन्धन, मर्म चिकित्सा और विभिन्न बीमारियों को दूर करने के उपाय बताए जाएंगे। शक्ति राणा ने विश्वविद्यालय से स्नातक स्तर पर शिक्षा ग्रहण की थी और शक्ति राणा के द्वारा चाईना में योग का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्हांने कहा कि योग के क्षेत्र में नए आयाम पैदा हो रहे हैं, योग सीखकर भावी पीढ़ी रोजगार की ओर अग्रसरित हो रही है। इस दिशा में हमारा विश्वविद्यालय अनुकरणीय भूमिका अदा कर रहा है। खेल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो आरकेएस डागर ने कहा कि योग आज एक शिक्षा नहीं है बल्कि योग हमारे जीवन की एक आवश्यकता है।योग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश गिरि ने कहा कि विदेशों से आए हुए ये प्रतिभागी किसी कला के मोहताज नहीं है। बल्कि योग सीखने के लिए इनके अन्दर भावनाएं उमड़ रही हैं। विभाग द्वारा यह प्रशिक्षण बड़ी सरलता के साथ दिया जा रहा है। हिन्दी से चाईनीज भाषा में अनुवाद कर इनको सिखाया जा रहा है। इस कार्य में अनुवादक शक्ति राणा का विशेष योगदान है। इस अवसर पर प्रो सोमदेव शतांशु, डा सत्यप्रकाश पाठक, डा सुरेन्द्र त्यागी, डा उधम सिंह, डा योगेश्वर दत्त तथा विभाग के सभी शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित थे।



