खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, होटल से सूजी-अचार के नमूने लेकर जांच को भेजे




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न्यूज 127, हरिद्वार।
चारधाम यात्रा और आगामी त्योहारों के मद्देनजर खाद्य पदार्थों में मिलावट और भ्रामक लेबलिंग पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जनपद में निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। गुरुवार को विभागीय टीम ने भूपतवाला के एक होटल से सूजी, अचार आपूर्ति करने वाली कंपनी के वाहन से अचार और औद्योगिक क्षेत्र स्थित बेकरी इकाई से मैदा के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। वहीं, अधोमानक पनीर के मामले में मेरठ की एक डेयरी कंपनी के निदेशक और भूपतवाला के एक होटल स्वामी के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर किया गया है।

खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा महिमानंद जोशी के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी कैलाश चंद्र टम्टा ने भूपतवाला क्षेत्र के होटलों और खाद्य कारोबार प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान एक होटल में मिलावट की आशंका के चलते सूजी का नमूना लिया गया।

भ्रामक लेबलिंग वाला अचार मिलने पर नोटिस
निरीक्षण के दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों को अचार की आपूर्ति करने वाली एक निर्माता कंपनी के वाहन की भी जांच की गई। विभाग के अनुसार, वाहन में भ्रामक लेबलिंग वाला अचार मिलने पर उसका नमूना संग्रहित किया गया। संबंधित कंपनी को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक बेकरी इकाई में इस्तेमाल हो रहे मैदा की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उसका नमूना भी जांच के लिए भेजा गया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, तीनों नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधोमानक पनीर पर दो मामलों में न्यायालय का रुख
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अधोमानक पनीर के निर्माण, वितरण और आपूर्ति के मामले में सरधाना डेयरी एंड फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, सरधाना, मेरठ के निदेशक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 51 के तहत अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), हरिद्वार के न्यायालय में वाद दायर किया है।

वहीं, भूपतवाला स्थित एक होटल में भोजन तैयार करने के लिए अधोमानक पनीर का इस्तेमाल किए जाने के मामले में होटल स्वामी के खिलाफ भी न्यायालय में वाद दायर किया गया है। अधिनियम की धारा 51 के तहत अधोमानक खाद्य पदार्थ के मामले में अधिकतम पांच लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान है।