कलयुगी दुर्योधन पुलकित तो मोह में धृतराष्ट्र बने विनोद आर्य








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नवीन चौहान
कलयुगी दुर्योधन बने पुलकित के मोह में विनोद आर्य पूरी तरह धृतराष्ट्र की भूमिका में नजर आए। बचपन से ही पुत्र को दंडित करने की जगह राजनैतिक संरक्षण प्रदान किया। उसकी काली करतूतों पर सजा ​देने की जगह पर्दा डालकर बचाने की कोशिश की गई। ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में योग्य विद्यार्थियों के बीच अपने नालायक पुत्र पुलकित का एडमिशन फर्जी तरीके से करा दिया। कॉलेज में छात्राओं को परेशान किया तो विनोद आर्य अपने बेटे की पैरवी करते नजर आए। पुलकित ने दुस्साहस की पराकाष्ठा को पार कर लिया और एक मासूम अंकिता के चीरहरण की कोशिश की गई। मासूम ने जिंदगी की गुहार लगाई तो पुलकित ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी जेल की सलाखों के पीछे है। तभी भी धृतराष्ट्र बने विनोद आर्य बड़ी बेशर्मी दिखाते नजर आए।
भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी से पहला सवाल है कि विनोद आर्य को बर्खाश्त क्यो नही किया/ जब पूरा उत्तराखंड अंकिता की आकस्मिक मृत्यु पर आक्रोषित है तो आरोपियों को संरक्षण प्रदान करने वाले विनोद आर्य को पार्टी से तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता क्यो नही दिखाया गया। छह दिनों से लापता अंकिता को पुलिस तलाश कर रही थी। विनोद आर्य बताए कि उनका पुत्र कहां था। पुत्र और उसके दोस्तों को कहां और किस जगह छिपाया हुआ था।
पुलकित को दुर्योधन बनाने में सबसे बड़ा हाथ विनोद आर्य का ही है। अगर अपने पुत्र की पहली गलती पर ही सजा दिलाई होती तो वह आज जेल नही गया होता। विनोद आर्य ने अपने पुत्र को बचपन से ही तमाम अत्याधुनिक सुख सुविधाएं दी। मंहगी गाड़ियां, अययाशी के लिए भारी जेब खर्च दिया गया। पुलकित बदतमीज होता जा रहा था। समाज में जीने का सलीका भूल गया। अंहकार सिर चढ़कर बोल रहा था। जबकि विनोद आर्य की दोनों आंखे पुत्र प्रेम में अंधी हो चुकी थी। बस यही से पुलकित के दुर्योधन बनने की कहानी शुरू हो गई। कॉलेज की लड़कियों से छेड़खानी करना आदत में शुमार हो गया। उसकी दबंगई बढ़ रही थी, लेकिन बाप का संरक्षण के चलते सभी की जुबां बंद थी।
विनोद आर्य ने अपने निक्कमे बेटे पुल
कित को रिजार्ट खुलवा दिया। अब रिजॉर्ट अपना बन गया तो शराब, कबाब की पार्टी आम हो गई। दोस्तों की अययाशी का ठिकाना हो गया। विनोद अपने बेटे को देखकर खुश थे। बेटा रोजगार में लग गया। लेकिन हकीकत में वह एक बदमाश बन चुका था। जिसको सुधारने के लिए पुलिस की सेवाओं की जरूरत थी। लेकिन धृतराष्ट्र को तो पुलिस अपनी सुरक्षा गार्द लगती थी। जो पूर्व राज्यमंत्री की सेवाओं में हाजिरी लगाए। अब वही पुलिस की सुरक्षा गार्द की आरोपी पुलकित की हिफाजत कर रही है। जनता से सुरक्षित बचाकर जेल की सलाखों में छोड़कर आई है।

यह घटना सबक है। उन सभी बाप के लिए जो अपने बेटे की गलती पर डांटने की जगह परदा डालते है।