न्यूज 127, हरिद्वार।
दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) रानीपुर, हरिद्वार में भारतीय संस्कृति, कला एवं परंपराओं को समर्पित अंतरविद्यालयी नृत्य प्रतियोगिता ‘नृत्य उत्सव – मिट्टी की महक’ का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों की 11 टीमों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध लोकनृत्य परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता के दौरान असम, पंजाब, बिहार, हरियाणा, राजस्थान एवं गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक मंच सज्जा, प्रभावशाली नृत्य संयोजन और लोकसंस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति की विविधता के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और देशप्रेम का संदेश भी देखने को मिला।

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद डीपीएस रानीपुर ने प्रथम स्थान, ग्रीनवे मॉडर्न स्कूल, हरिद्वार ने द्वितीय स्थान तथा न्यू सेंट थॉमस एकेडमी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों की विशिष्ट प्रतिभा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए बेस्ट प्रॉप्स, बेस्ट कॉस्ट्यूम एवं बेस्ट कोरियोग्राफी के पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में प्रज्ञा दीक्षित, नरेंद्र सिंह राणा, रीना राणा, पद्मा कृष्णमोहन, अमित तिवारी, रितु तिवारी, आशीष गुप्ता, प्राची गुप्ता, गुंजन शुक्ला तथा मनीषा जग्गा सहित विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए इस आयोजन को भारतीय लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने कहा कि ‘नृत्य उत्सव – मिट्टी की महक’ का उद्देश्य डीपीएस रानीपुर सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि भारत की विविध संस्कृतियों और परंपराओं से विद्यार्थियों को परिचित कराते हुए नृत्य के माध्यम से ‘अनेकता में एकता’ की भावना को प्रोत्साहित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में देशभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं सामूहिक कार्यक्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों की सराहना तथा अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। ‘नृत्य उत्सव – मिट्टी की महक’ ने भारतीय लोकसंस्कृति की सुगंध को मंच पर साकार करते हुए विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने का प्रेरणादायी संदेश दिया।




