फाइनल रिपोर्ट के नाम पर रिश्वतखोरी! दो दरोगाओं पर मुकदमा




Listen to this article

3.50 लाख और पांच लाख रुपये मांगने का आरोप, ऑडियो-वीडियो साक्ष्य देने के बाद हुई थी जांच

पथ प्रवाह, हरिद्वार।
हरिद्वार के गंगनहर कोतवाली में दर्ज एक मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) लगाने के नाम पर रिश्वत लेने और अतिरिक्त रकम नहीं देने पर गोली मारकर जेल भेजने की धमकी देने के आरोप में दो उपनिरीक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बागपत जिले के निरपुड़ा निवासी निश्चय राणा की शिकायत पर तत्कालीन विवेचक मनदीप सिंह और उपनिरीक्षक बलवंत पंवार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता ने दोनों पुलिसकर्मियों पर अलग-अलग समय पर रकम लेने और अतिरिक्त पैसे के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।

मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि शिकायतकर्ता के मुताबिक, तत्कालीन एसपी देहात की जांच में दोनों उपनिरीक्षकों को दोषी पाया गया था, लेकिन मुकदमा दर्ज होने में करीब 16 महीने लग गए। हालांकि, दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

2023 में दर्ज हुआ था मुकदमा

शिकायत के अनुसार, सुषमा सैनी पत्नी बाबूराम सैनी ने पांच जुलाई 2023 को गंगनहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें निश्चय राणा के छोटे भाई निवेश राणा को आरोपित बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने फरवरी 2023 की घटना के संबंध में करीब पांच महीने बाद मुकदमा दर्ज कराए जाने पर भी सवाल उठाए।

निश्चय राणा का आरोप है कि मामले के तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक मनदीप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर उन्हें डराया-धमकाया और 3.50 लाख रुपये ले लिए। इसके बाद छह अक्टूबर 2024 को मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई।

दोबारा विवेचना शुरू होने पर पांच लाख मांगने का आरोप

शिकायतकर्ता के मुताबिक, बाद में मुकदमे की दोबारा विवेचना शुरू हुई तो उपनिरीक्षक बलवंत पंवार ने भी फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर पांच लाख रुपये की मांग की। आरोप है कि रकम नहीं देने पर निवेश राणा को गोली मारकर जेल भेजने की धमकी दी गई।

निश्चय राणा का कहना है कि भाई की सुरक्षा को लेकर चिंतित होने के कारण उन्होंने कथित तौर पर एक लाख रुपये दे दिए। इसके बावजूद उनसे चार लाख रुपये और मांगे जाने लगे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शेष रकम देने में असमर्थता जताने पर विवेचना रोकने और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई।

ऑडियो-वीडियो साक्ष्य देकर की थी शिकायत

निश्चय राणा के अनुसार, उन्होंने एक जुलाई 2025 को तत्कालीन एसएसपी को शिकायत देकर ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग समेत अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। इसके बाद मामले की जांच एसपी देहात को सौंपी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच आख्या में दोनों उपनिरीक्षकों को दोषी पाया गया था।

उन्होंने 18 अक्टूबर 2026 को दी गई शिकायत के साथ जांच आख्या की छायाप्रति भी संलग्न की थी। अब दोनों उपनिरीक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।