न्यूज 127, हरिद्वार:
दशहरे के अवसर पर गंगा की सफाई के लिए विश्वविख्यात हरकी पैड़ी की जलधारा रोककर घाट को जलविहीन कर दिया गया है। पानी नीलधारा की ओर छोड़े जाने के बाद हरकी पैड़ी का दृश्य पूरी तरह बदल गया है, जो समाज के दो अलग-अलग पहलुओं को बयां कर रहा है।
एक तरफ गंगा के सूखे तल और बालू-पत्थरों के बीच श्रद्धालु द्वारा अर्पित किए गए सिक्के तलाशने वालों की भारी भीड़ जुट गई है। कई लोग मजदूरी छोड़कर या नौकरी से छुट्टी लेकर सुबह से ही रेत छानकर सिक्के खोजने में लगे हैं, जो उनके लिए आजीविका और अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गया है।
दूसरी ओर, देश-विदेश से मां गंगा के दर्शन और पवित्र स्नान की उम्मीद लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं को सूखी तलहटी देखकर भारी निराशा हो रही है। कई यात्री मायूस होकर ऋषिकेश या अन्य वैकल्पिक घाटों का रुख कर रहे हैं।
हालांकि घाटों की स्वच्छता के लिए सफाई कार्य बेहद आवश्यक है, लेकिन जानकारों का मानना है कि प्रशासन को जलधारा रोके जाने की सूचना समय पर देनी चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े।


