आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का ज्ञान भी जरूरी: मुख्यमंत्री




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न्यूज 127, देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संस्कारवान, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। ज्ञान व्यक्ति को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों का ज्ञान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री बुधवार को देहरादून स्थित द टॉसब्रिज स्कूल में आयोजित संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कार दिवस भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है।

डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने के लिए निरंतर परिश्रम और दृढ़ संकल्प जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम की आत्मकथा ‘विंग्स ऑफ फायर’ (अग्नि की उड़ान) पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय के ध्येय वाक्य ‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्म के बिना ज्ञान अधूरा है। ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसका उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में किया जाए। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना, बड़ों का सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता और सभी के प्रति आदर को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषताएं बताया।

तकनीक के साथ संस्कारों का समन्वय जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता और रचनात्मकता विकसित करने के साथ योग, ध्यान, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल और रचनात्मकता पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार भी युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उनके अनुसार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छा ही आगे बढ़ने का वास्तविक आधार हैं। असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को पूरा करने में शिक्षित, संस्कारित, कुशल और आत्मनिर्भर युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थी अपनी प्रतिभा और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन के पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।