हरिद्वार: आज आधी रात से बंद हो जाएगी गंग नहर, बंदी के दौरान अर्धकुंभ के नए घाटों के निर्माण को मिलेगी गति




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न्यूज 127, हरिद्वार।
हरिद्वार में दशहरा से दीपावली तक साफ-सफाई, अनुरक्षण और मरम्मत कार्यों के लिए वार्षिक परंपरा के तहत गंग नहर (उत्तराखंड में ऊपरी गंगा नहर) को बंद किया जाएगा। सिंचाई विभाग की घोषणा के अनुसार, गंग नहर 20-21 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि से 7-8 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि तक यानी कुल 20 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक बंद रहेगी। इस क्लोजर अवधि का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उपयोग आगामी अर्धकुंभ मेला व्यवस्था के तहत मेला अधिष्ठान द्वारा नए घाटों के निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए किया जा रहा है।

सिंचाई विभाग के पुनर्वास खंड पर तय समय सीमा के भीतर इस विशाल निर्माण कार्य को पूरा करने का भारी दबाव बना हुआ है, जिसके चलते अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तय समय में काम पूरा करना विभाग का मुख्य लक्ष्य बन चुका है, ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लाजिमी हैं। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार देर शाम तक भी कई घाट स्थलों पर भारी निर्माण मशीनों और मजदूरों के साथ युद्धस्तर पर काम चलता देखा गया।

सबसे बड़ा सवाल गंग नहर के बाएं किनारे पर बनाए जा रहे लगभग दो किलोमीटर लंबे नए घाटों की व्यावहारिक उपयोगिता और सुगमता को लेकर है। विभागीय अधिकारियों के दावों के विपरीत, इन नए घाटों तक लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की पहुंच कैसे सुगम होगी, इसे लेकर कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग के बिल्कुल किनारे इन घाटों का निर्माण होना सुरक्षा की दृष्टि से भी एक बड़ा और चिंताजनक सवाल खड़ा करता है। इसके अलावा, पार्किंग की भारी किल्लत यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक विकट समस्या बन सकती है।

नहर में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से बहुत नीचे उतरकर भारी संख्या में सीढ़ियां पार करनी होंगी, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या प्रशासन सीमित समय के भीतर इन घाटों का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा कर पाएगा या नहीं। जानकारों का मानना है कि इस जल्दबाजी के माहौल में यदि गुणवत्ता से समझौता होता है, तो आने वाले समय में यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए राहत के बजाय बड़ी मुसीबत बन सकती है।