न्यूज 127, ऋषिकेश।
एम्स ऋषिकेश में CRE-3 भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। वायरमैन पद के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन के समय असली अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुँचे एक फर्जी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि इस मामले में मूल अभ्यर्थी परीक्षा पास करने के बाद एम्स में कार्यभार भी ग्रहण कर चुका था, लेकिन बायोमेट्रिक मिलान के दौरान यह खेल पकड़ा गया।
फोटो में अंतर मिलने पर हुआ शक
एम्स ऋषिकेश में 17 अक्टूबर 2026 को CRE-3 भर्ती के तहत अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान वायरमैन पद के लिए आए विकास कुमार मीणा के दस्तावेजों की जाँच में संदेह उत्पन्न हुआ। अभिलेखों के मिलान पर पाया गया कि परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्ति और एम्स में नियुक्त होकर कार्यभार संभालने वाले व्यक्ति की शक्ल (फोटो) में अंतर है, जबकि कागजों में नाम और विवरण समान थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह ने पुलिस चौकी एम्स में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर कोतवाली ऋषिकेश में बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं (धोखाधड़ी, कूटसाक्ष्य और षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
राजस्थान का रहने वाला है गिरफ्तार आरोपी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने साक्ष्य संकलन के बाद आज (18 अक्टूबर) बायोमेट्रिक सत्यापन कराने पहुँचे फर्जी अभ्यर्थी अशोक कुमार मीणा पुत्र स्व. रामकरण मीणा (निवासी जटाली ढाणी, काली पहाड़ी, दौसा, राजस्थान) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जिला कारागार देहरादून भेज दिया गया है।
वहीं, इस फर्जीवाड़े का मुख्य फायदा उठाने वाला मूल अभ्यर्थी विकास कुमार मीणा पुत्र धनफूल मीणा (निवासी जटाली ढाणी, दौसा, राजस्थान), जिसने एम्स में नौकरी ज्वाइन की थी, घटना के बाद से फरार चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और इस पूरे रैकेट में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी गहनता से जाँच की जा रही है।


