पुलिसकर्मी कांवडि़यों की सेवा में है, सॉरी बोलकर सुलझा ले विवाद








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नवीन चौहान
कांवड़ मेला अपने चरम की ओर अग्रसरित हैं। शिवभक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। पुलिसकर्मियों ने सड़कों पर मोर्चा संभाल लिया है। शिवभक्तों की सुरक्षा और व्यवस्था को बनाने में पुलिस जुटी है। ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों को कई बार समस्या से दो चार होना पड़ सकता हैं। रूट डायवर्जन के चलते आपको अपने घर की ओर जाने के लिए इधर-उधर के रास्तों में घूम कर जाना पड़ सकता है। पुलिसकर्मी बहुत सीमित संसाधनों में डयूटी कर रहे है। जिसके चलते पुलिसकर्मियों का सहयोग करने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी हरिद्वारवासियों की है। ऐसे में सभी स्थानीय नागरिक रूट डायवर्जन के दौरान पुलिस चैक पोस्ट पर अपने क्रोध पर काबू करें और पुलिसकर्मियों का सहयोग करें। पुलिसकर्मियों से उलझकर विवाद की स्थिति उत्पन्न ना होने दें। हरिद्वार के स्थानीय नागरिकों का ये सहयोग पुलिस की व्यवस्था को बेहतर बनाने में कारगर होगा और सुरक्षा एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगा।
उत्तराखंड पुलिस के अधिकारी कांवड़ मेले में करीब तीन करोड़ शिवभक्तों के आने की संभावना जता रहे है। इन शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए व्यापक स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिसकर्मियों को नम्र आचरण रखने के निर्देश जारी किए गए है। पुलिस चैक पोस्ट पर भीड़ को देखते हुए रूट डायवर्जन का प्लान बनाया गया है। इन शिवभक्तों की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस बल 12-12 घंटे की डयूटी कर रहे है। आसमान से आग बरसाती भीषण गर्मी के मौसम में जवान अपना मानसिक संतुलन बनाकर कांवडि़यों को उनके गंतव्य की ओर रवाना कर रहे है। इन मुश्किल हालातों में पुलिस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों की हालत खस्ताहाल है। इन सड़कों को दुरस्त कराना और वाहनों को सुरक्षित पार्किंग करना के साथ उनकी हिफाजत करना पुलिस की ही जिम्मेदारी है। कांवडि़यों की भारी भीड़ में हरिद्वारवासियों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। अपने घर जाने के लिए घूम कर जाना पड़ता है। पुलिस चैक पोस्ट पर विवाद के हालात बन जाते है। स्थानीय नागरिकों और पुलिस के बीच ऊंची आवाज में बात करना भी और बातचीत के बीच शब्दों का प्रयोग विवाद की बड़ी वजह बन जाता है। पुलिस के जवान खुद को असहज पाते है। अधिकारियों के आदेश का अनुपालन कराना और मौके पर विवाद को टालना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सहयोग ही पुलिस का मनोबल बढ़ाने के लिए काफी है। अगर पुलिसकर्मी आपको किसी स्थान से घूमकर जाने के लिए कहें तो इसे पुलिसकर्मी का आदेश अथवा हुक्म समझने की वजाय पुलिस अधिकारियों की एक व्यवस्था का हिस्सा समझकर पुलिसकर्मी की बात मान ली जायेगी तो विवाद टल जायेगा। पुराने पुलिसकर्मी बड़े-बड़े विवाद को बातचीत से और नम्र भाषा में बात करके सुलझाते रहे है। हालांकि एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूरी ने डयूटी प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी भाषा में शालीनता बरतने के निर्देश दिए है। लेकिन फिर भी टकराव की नौबत आ जाती है तो उसे सॉरी बोलकर खत्म करने का प्रयास करें।